भारत में भगदड़ से इस साल 114 मरे
भारत में भगदड़ से 114 मरे, इस साल, अब तक
नई दिल्ली । डेस्क: इस साल भारत में भगदड़ की घटनाओं में कम से कम 114 लोगों की मौत हुई है, जो हाल के समय में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है. ये दुखद दुर्घटनाएँ, जो धार्मिक आयोजनों से लेकर खेल आयोजनों तक में हुई हैं, भीड़ प्रबंधन में कमी और अपर्याप्त तैयारियों की ओर इशारा करती हैं, जो एक बार-बार होने वाली और रोकी जा सकने वाली समस्या है.
सबसे हाल की घटना शनिवार सुबह आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित काशीबुग्गा वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई, जहां एकादशी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए थे. अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए.
इस घटना के साथ, 2025 में भगदड़ से होने वाली मौतों का आंकड़ा 114 तक पहुंच गया है. तुलनात्मक रूप से, 2024 में 123 मौतें हुई थीं, जिनमें से अधिकतर उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक सत्संग के बाद हुई भयानक भगदड़ के कारण थीं, जिसमें 116 लोग मारे गए थे.
श्रीकाकुलम की घटना इस वर्ष की छठी बड़ी भगदड़ है. यह बार-बार खराब भीड़ प्रबंधन, कमजोर संचार व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों में कमी के मुद्दों को उजागर करती है. अधिकारी अक्सर लोगों की अनुमानित संख्या को कम आंकते हैं, जिससे अत्यधिक भीड़ और घबराहट की स्थिति पैदा होती है.
इस साल पहले ही कई बड़ी दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं:
29 जनवरी को महाकुंभ के दौरान 30 श्रद्धालुओं की जान चली गई.
15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई.
उत्तरी गोवा के शिरगांव गांव में लारई जात्रा उत्सव में भारी भीड़ के बीच सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई.
4 जून को, बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास आरसीबी के पहले आईपीएल खिताब के जश्न के दौरान 11 प्रशंसकों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए.
सबसे हाल की आपदा तमिलनाडु के करूर में हुई, जहां तमिलगा वेट्टी कज़गम (TVK) प्रमुख और अभिनेता विजय की एक रैली में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई, जिसने एक बार फिर बड़े समारोहों में मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है.