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असम में विनाशकारी बाढ़ का कारण मानवीय गलतियां: रिपोर्ट

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19 अग. 2026, 06:25 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

असम में बाढ़
असम में बाढ़

नई दिल्ली । डेस्क: पूर्वोत्तर भारत में तबाही मचाने वाली असम की हालिया बाढ़ को लेकर एक बड़ा वैज्ञानिक खुलासा हुआ है. 'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, इस साल असम में आई भयावह बाढ़ का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हुई मानवीय गलतियां और पर्यावरणीय नुकसान हैं.


अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि असम और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में हुई मानसूनी बारिश ऐतिहासिक मानकों के भीतर ही थी. 


मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि ऐसी बारिश असामान्य नहीं है और यह हर दो साल में कम से कम एक बार दर्ज की जाती है.


मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हर प्राकृतिक आपदा को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं है. असम में आई बाढ़ का वास्तविक कारण अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) का विनाश और नदियों के किनारे हो रहा लगातार कटाव है. 


इन कारणों से प्रकृति की स्वाभाविक जल निकासी क्षमता खत्म हो गई, जिससे बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों में तबाही मचाने लगा.


इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर बनाए गए कंक्रीट के पक्के तटबंधों ने समस्या को और बढ़ा दिया है. 


इन तटबंधों के कारण नदियों की तलछट में गाद जमा होती गई, जिससे नदी का स्तर कृत्रिम रूप से ऊपर उठ गया. जब ये कमजोर तटबंध टूटे तो इसने और अधिक भीषण तबाही का रूप ले लिया. 

वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि यह आपदा जलवायु के बिगड़ने से ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप, पर्यावरण के क्षरण और कमजोर बुनियादी ढांचे का नतीजा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP