ईरान की सैन्य शक्ति के बारे में अमेरिकी आकलन कितना सही है?
तेहरान । डेस्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन और उनकी खुफिया एजेंसियों के बीच ईरान की वास्तविक सैन्य शक्ति को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुए इस 40 दिवसीय युद्ध के बाद व्हाइट हाउस जहां अपनी 'पूर्ण विजय' का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत और खुफिया रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. सवाल यह उठता है कि क्या ट्रम्प प्रशासन का दावा सही है या ईरान अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. ट्रम्प के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की नौसेना, वायुसेना और उनके शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया है. हेगसेथ ने तो इसे 'ऐतिहासिक जीत' बताते हुए दावा किया कि ईरान अब कई वर्षों तक युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं रहेगा. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 13,000 से अधिक ठिकानों पर हमला करके ईरान की नौसेना के 90 प्रतिशत बड़े जहाजों को डुबो दिया गया है.
प्रशासन के इन दावों के विपरीत, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और रक्षा विशेषज्ञ एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. सीबीएस न्यूज ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान का सैन्य ढांचा उतना तबाह नहीं हुआ है जितना दावा किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का लगभग आधा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार और लॉन्च सिस्टम अभी भी पूरी तरह सुरक्षित और कार्यात्मक है. इसके अलावा, ईरान की वायुसेना का दो-तिहाई हिस्सा और आईआरजीसी (IRGC) की नौसेना का 60 प्रतिशत हिस्सा अब भी ऑपरेशनल है. डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स एडम्स ने स्पष्ट किया है कि ईरान के पास अब भी हजारों मिसाइलें और घातक 'वन-वे अटैक ड्रोन' मौजूद हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान के नियंत्रण ने दावों की पोल खोली
ईरान की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर उसका आज भी कायम नियंत्रण है. यदि अमेरिकी दावा सही होता कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, तो इस सामरिक जलमार्ग पर अमेरिका का कब्जा होना चाहिए था. इसके विपरीत, ईरान ने इस मार्ग से अपने दुश्मनों के जहाजों का गुजरना पूरी तरह बंद कर रखा है. यहां तक कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद ईरान ने हाल ही में दो जहाजों को ज़ब्त करके यह साबित कर दिया कि समुद्र में उसकी चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है.
अमेरिकी संसाधनों पर भारी बोझ और गिरता भंडार
इस युद्ध ने केवल ईरान को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों को भी गंभीर रूप से निचोड़ दिया है. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, 39 दिनों के युद्ध में अमेरिका ने इतनी मिसाइलें दागी हैं कि उसके अपने वैश्विक भंडार में कमी आने लगी है. अमेरिका ने लगभग 1,100 JASSM-ER और 1,000 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. अकेले टॉमहॉक मिसाइलों की यह संख्या अमेरिका द्वारा एक साल में खरीदी जाने वाली मिसाइलों से दस गुना अधिक है. लगभग 35 बिलियन डॉलर के इस खर्च ने पेंटागन को एशिया और यूरोप से हथियारों को हटाने पर मजबूर कर दिया है, जिससे अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी पकड़ कमजोर हो सकती है.
ईरान की सैन्य शक्ति का एक बड़ा हिस्सा उसकी 'स्वदेशी क्षमता' है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दशकों में ईरान ने अपने हथियारों के उत्पादन को पूरी तरह घरेलू तकनीक पर आधारित कर लिया है. ब्रिगेडियर जनरल रज़ा तलाई-निक का कहना है कि उनकी मिसाइल शक्ति का एक बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल ही नहीं हुआ है और वह किसी भी लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं.
निष्कर्षतः, ट्रम्प प्रशासन का आकलन जहां राजनीतिक जीत की छवि पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य शक्ति को कम आंकना एक रणनीतिक भूल हो सकती है. ईरान ने अपनी लचीली रक्षा प्रणाली और सामरिक जलमार्गों पर पकड़ के जरिए यह दिखा दिया है कि उसे 'Combat Ineffective' या युद्ध के लिए अक्षम कहना जल्दबाजी होगी.