रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीद बढ़ी
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने का समझौता अब "पहले से कहीं ज्यादा करीब" है. उन्होंने यह बात बर्लिन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की और फ्रांस, जर्मनी, यूके जैसे बड़े यूरोपीय देशों के नेताओं के साथ लंबी बातचीत के बाद कही.
ट्रम्प ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "यूरोपीय नेताओं का हमें बहुत बड़ा साथ मिल रहा है. वे भी इस युद्ध को जल्द से जल्द ख़त्म करना चाहते हैं." उन्होंने यह भी बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी कई बार बात हुई है, और उन्हें लगता है कि अब हल निकलने की उम्मीद पहले से कहीं ज़्यादा है.
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी कहा था कि अमेरिका और यूरोप के नेताओं के साथ बातचीत मुश्किल ज़रूर थी, लेकिन नतीजे अच्छे रहे.
यह उच्च स्तरीय बातचीत बर्लिन में दो दिनों तक चली. अमेरिका लगातार यूक्रेन पर दबाव बना रहा है कि वह मॉस्को के साथ कुछ रियायतें दे ताकि यह युद्ध खत्म हो सके.
बातचीत खत्म होने के बाद यूरोपीय नेताओं ने कहा कि वे और अमेरिका मिलकर यूक्रेन को 'पक्की सुरक्षा गारंटी' देने के लिए तैयार हैं. इसके तहत एक यूरोपीय-नेतृत्व वाला "बहुराष्ट्रीय बल" बनेगा, जिसे अमेरिका का समर्थन मिलेगा. अधिकारियों ने बताया कि यह सुरक्षा गारंटी लगभग 'नाटो के आर्टिकल 5' जैसी होगी.
इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में यूक्रेन पर हमला होता है, तो ये देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे. यूक्रेन ने भी संकेत दिया है कि अगर उसे पश्चिमी देशों से ऐसी मज़बूत सुरक्षा गारंटी मिल जाती है, तो वह नाटो में शामिल होने की अपनी ज़िद छोड़ सकता है.
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि अमेरिका ने जो सुरक्षा गारंटी देने की पेशकश की है, वह वाकई में "बहुत दमदार" है, और अब शांति के लिए सही मौका है.
हालांकि, उन्होंने साफ़ कर दिया कि जंग में कब्ज़ा की गई ज़मीन को लेकर अभी भी बड़ा मतभेद है. मर्ज़ ने ज़ोर देकर कहा, "ज़मीन किसको देनी है, यह फैसला सिर्फ़ यूक्रेन ही करेगा. इसमें कोई शर्त या किंतु-परंतु नहीं होगा."
उधर, रूस में, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन शांति के लिए "खुले मन" से तैयार हैं, लेकिन वे किसी तरह के "कुछ समय की राहत या बहानेबाजी" के खिलाफ हैं.
संक्षेप में, युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं और यूक्रेन को बड़ी सुरक्षा गारंटी मिल सकती है, लेकिन रूस को कितनी ज़मीन लौटाई जाएगी, इस सबसे मुश्किल सवाल पर अभी भी कोई सहमति नहीं बन पाई है.