भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये डूबे
मुंबई । डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन 'ब्लैक मंडे' साबित हुआ, जहां चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह झकझोर दिया है.
दोपहर के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 1,930 अंकों की भारी गिरावट के साथ 72,601 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 प्रमुख 22,500 के स्तर को तोड़कर 22,494 पर फिसल गया.
इस जबरदस्त गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 13 लाख करोड़ रुपये घटकर 416 लाख करोड़ रुपये रह गया.
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में गहराता संकट है, जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम ने युद्ध की आशंका को चरम पर पहुँचा दिया है.
इसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 113 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं.
इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जिससे रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
घरेलू मोर्चे पर सरकारी तेल कंपनियों द्वारा इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी ने भी आग में घी डालने का काम किया, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की चिंताएं बढ़ गई हैं.
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिसमें टाटा स्टील, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयरों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई.
विशेष रूप से मेटल और पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
गौरतलब है कि बाजार की यह गिरावट संयोगवश 23 मार्च, 2020 की उस बरसी पर आई है जब कोविड लॉकडाउन के कारण बाजार में 13 प्रतिशत का ऐतिहासिक क्रैश हुआ था.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. फिलहाल तकनीकी चार्ट पर निफ्टी अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल से नीचे बना हुआ है, जो निकट भविष्य में और कमजोरी के संकेत दे रहा है.