ग्लोबल टाइम्स: अमेरिकी प्रतिबंधों पर चीन का कड़ा जवाब
बीजिंग । डेस्क: चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर एक बार फिर तल्खी बढ़ती नजर आ रही है. चीन ने अमेरिका द्वारा चीनी संस्थाओं पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों और दंडात्मक उपायों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि द्विपक्षीय व्यापार में सद्भाव और प्रतिबद्धता दोनों पक्षों की ओर से होनी चाहिए. चीन का कहना है कि उसने अब तक काफी संयम दिखाया है, लेकिन यदि अमेरिका नए प्रतिबंध लागू करने की अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो चीन की प्रतिक्रिया और भी ज्यादा दृढ़ और निर्णायक होगी.
चीनी वाणिज्य मंत्रालय का दंडात्मक कदम
हाल ही में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिकी कदमों के जवाब में सिलसिलेवार जवाबी उपायों और निर्यात नियंत्रण कदमों की घोषणा की है. इस नई व्यवस्था के तहत चीन ने 'कम्प्लायंस टेस्टिंग एलएलसी' और 'अप्लाइड डीएनए साइंसेज' जैसी प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को अपनी जवाबी सूची में शामिल कर दिया है.
इसके तहत अब इन संस्थाओं को चीन के भीतर किसी भी संगठन या व्यक्ति के साथ व्यापारिक लेन-देन और सहयोग करने से पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. चीन सरकार का तर्क है कि ये कदम पूरी तरह से लक्षित और कानूनी ढांचे के भीतर उठाए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों और चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों की रक्षा करना है.
अमेरिकी संस्थाओं की गतिविधियों पर चीनी आपत्ति
चीन ने उन आधारों को सार्वजनिक किया है जिनके तहत इन अमेरिकी कंपनियों को निशाने पर लिया गया है. आरोप है कि अप्लाइड डीएनए साइंसेज जैसी कंपनियों ने चीन से अमेरिका निर्यात होने वाले सामानों की 'दोषी मान लेने की धारणा' के आधार पर जांच की और शिनजियांग से होने वाले कपास आयात को शून्य करने की कोशिश की.
इसी प्रकार ऑल्टाना टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके चीन की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को ट्रैक कर रही थीं, जिससे अमेरिकी सीमा शुल्क प्रवर्तन को मदद मिल सके.
इसके अलावा कुछ अन्य संगठनों पर ऑनलाइन सामग्रियों को जोड़कर मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने और चीन के आंतरिक मामलों जैसे शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग के मुद्दों पर भ्रम फैलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
प्रतिबंधों के तंत्र को ध्वस्त करने की रणनीति
चीनी पक्ष के अनुसार, अमेरिका केवल सरकारी स्तर पर ही प्रतिबंध नहीं लगाता, बल्कि इसमें प्रमाणीकरण एजेंसियों, डेटा प्लेटफार्मों और मानवाधिकार संगठनों का एक एकीकृत नेटवर्क शामिल होता है. ये संस्थाएं अक्सर अनुपालन समीक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की जांच के नाम पर वैध व्यावसायिक संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करती हैं और बाजार में उनकी पहुंच को बाधित करती हैं.
चीन द्वारा उठाए गए नए कदमों का उद्देश्य इस पूरे तंत्र को करारा जवाब देना है, ताकि ऐसी संस्थाओं को चीनी बाजार से लाभ कमाने से रोका जा सके.
सामान्य व्यापार और प्रतिबंधों में स्पष्ट अंतर
चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी जवाबी कार्रवाई सभी अमेरिकी कंपनियों पर अंधाधुंध लागू नहीं होती. चीन सामान्य आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता. नीति का मूल सिद्धांत यह है कि कार्रवाई और जिम्मेदारी एक-दूसरे के अनुरूप होनी चाहिए.
जो कंपनियां सीधे तौर पर चीनी हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं, उन्हें ही इस नीति की लागत उठानी होगी. चीन के 'विदेशी प्रतिबंध रोधी कानून' के तहत उठाए गए इन कदमों से सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों और एकतरफा प्रतिबंधों में भागीदार बनने वाली कंपनियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींच दी गई है.
शीर्ष नेतृत्व की सहमति और भविष्य की राह
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि चीन-अमेरिका संबंध स्थिरता की ओर बढ़ेंगे. हालांकि, अमेरिकी संचार आयोग और अन्य विभागों द्वारा लगातार उठाए जा रहे कड़े कदमों से इस सहमति पर असर पड़ा है.
इसके बावजूद चीन का कहना है कि उसके जवाबी कदम टकराव बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों के नेतृत्व द्वारा बनाए गए मार्गदर्शन को बनाए रखने के लिए हैं.
यदि अमेरिका अपनी गलतियों में सुधार करता है, तो दोनों देशों के पास मतभेदों को प्रबंधित करने और सहयोग का विस्तार करने की पर्याप्त गुंजाइश बनी रहेगी. लेकिन यह स्पष्ट है कि व्यापारिक सहयोग सिद्धांतों और कोर हितों की कीमत पर नहीं हो सकता.