आर्थिक सर्वेक्षण 2026: भारतीय रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से पीछे
नई दिल्ली । डेस्क: गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, भारतीय रुपया अपनी मजबूत आर्थिक बुनियादी स्थिति के बावजूद 2025 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया है. सर्वेक्षण में स्पष्ट कहा गया है कि रुपया वर्तमान में अपनी वास्तविक क्षमता से कम यानी 'पंचिंग बिलो इट्स वेट' पर ट्रेड कर रहा है.
हालांकि, सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रुपये का कमजोर होना भारत के लिए ज्यादा नुकसानदेह नहीं है, क्योंकि यह अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने में मदद कर रहा है और कच्चे तेल के स्थिर दामों के कारण फिलहाल मुद्रास्फीति का कोई बड़ा खतरा नहीं है.
बाजार में रुपये की गिरावट का सिलसिला आज भी जारी रहा और यह डॉलर के मुकाबले 92 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
इस साल अब तक रुपये में 2% की गिरावट आ चुकी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से यह लगभग 5% टूट चुका है.
सर्वेक्षण में आगाह किया गया है कि रुपये में अस्थिरता और विदेशी पूंजी के प्रवाह में कमी के कारण निवेशक अब भारत में निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है.
भारत का वस्तु व्यापार घाटा और सेवाओं से होने वाले अधिशेष के बीच का अंतर विदेशी पूंजी पर निर्भरता बढ़ाता है, और जब यह प्रवाह कम होता है, तो रुपये की स्थिरता प्रभावित होती है.
हालांकि भारत 8.2% की जीडीपी वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो से पूंजी की निकासी और कॉर्पोरेट जगत में रुपये की भविष्य की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है.