सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

इबोला: कांगो से लौटने वाले नेपाली सैनिक 21 दिन क्वारंटाइन रहेंगे

C

CG Khabar

23 मई 2026, 06:45 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

नेपाली आर्मी
नेपाली आर्मी

काठमांडू । डेस्क: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में घातक इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए नेपाली सेना ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कांगो में तैनात नेपाली शांति सैनिकों के वापस लौटने पर अब 21 दिनों का अनिवार्य आइसोलेशन (पृथकवास) लागू किया जाएगा. 


यह कदम वायरस के संभावित प्रसार को रोकने और देश की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. वर्तमान में कांगो के इतूरी प्रांत के बुनिया सहित विभिन्न इलाकों में 970 से अधिक नेपाली शांति सैनिक तैनात हैं. बुनिया को पिछले महीने सामने आए इस खतरनाक वायरस के प्रकोप का मुख्य केंद्र माना जा रहा है.

विज्ञापन


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कांगो और युगांडा में इबोला के 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन के कम से कम 51 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अब तक 144 लोगों की मौत हो चुकी है और 600 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इबोला के इस विशिष्ट स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई टीका उपलब्ध नहीं है. 


नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित देशों से लौटने वाले किसी भी सैन्य कर्मी को 21 दिनों का आइसोलेशन पूरा होने से पहले किसी से भी मिलने या घर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. सेना इस जोखिम से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर लगातार समन्वय कर रही है.


सेना ने कांगो में तैनात अपने सैनिकों के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल जारी किए हैं. वर्तमान में सैनिकों के नियमित रोटेशन की योजना को स्थगित कर दिया गया है, और केवल आपातकालीन स्थिति में ही किसी को लौटने की अनुमति होगी, जिसके बाद उन्हें सीधे आइसोलेशन में भेजा जाएगा. 


राहत की बात यह है कि अब तक कोई भी नेपाली सैनिक इस वायरस से संक्रमित नहीं हुआ है. 


दूसरी ओर, भारत ने भी इस स्थिति को देखते हुए अफ्रीकी देशों से जुड़े नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है और दिल्ली में होने वाले भारत-अफ्रीका फोरम समिट को स्थगित कर दिया है. 


नेपाल ने फिलहाल त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित स्वास्थ्य डेस्क को अलर्ट करने के अलावा कोई व्यापक ट्रैवल एडवाइजरी जारी नहीं की है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक गतिशीलता के कारण नेपाल जैसे देश संक्रामक बीमारियों के प्रति संवेदनशील हैं, इसलिए लैब क्षमता और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP