दिल्ली HC: माँ की उपेक्षा के कारण बच्चे की कस्टडी पिता को
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक चार साल के बच्चे की कस्टडी पिता को दिए जाने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है.
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केवल व्यभिचार (adultery) ही कस्टडी तय करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता, लेकिन जब यह माता-पिता के कर्तव्यों की जानबूझकर की गई उपेक्षा और परित्याग के साथ होता है, तो यह निर्णय को सही ठहराता है.
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि माँ का कथित विवाह से बाहर का संबंध निर्णय का मुख्य कारण नहीं था. हालांकि, जब इस संबंध को बच्चे की बार-बार उपेक्षा और देखभाल में लापरवाही के साथ देखा गया, जैसा कि स्थानीय पुलिस स्टेशन की रिपोर्ट में भी दर्ज है, तो बच्चे के कल्याण के लिए पिता को कस्टडी देना उचित पाया गया.
कोर्ट ने अपने फैसले में यह निष्कर्ष निकाला कि नाबालिग की कस्टडी "प्रतिवादी-पिता की देखभाल में सबसे अच्छी तरह से सुरक्षित रहेगी." फैमिली कोर्ट ने 8 जुलाई, 2025 को अंतरिम कस्टडी पिता को सौंपते हुए माँ को सीमित मुलाकात (हर रविवार, 2.00 बजे से 4.00 बजे तक) की अनुमति दी थी.