India-EU FTA पर कांग्रेस की चेतावनी: 'कार्बन टैक्स से डूबेगा निर्यात'
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस समझौते को "अत्यधिक प्रचारित" करार देते हुए चेतावनी दी है कि यह भारतीय उद्योगों, विशेषकर स्टील और एल्युमीनियम क्षेत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.
उन्होंने कहा कि 1 जनवरी, 2026 से लागू हुए यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के कारण भारतीय निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
कांग्रेस के अनुसार, भारतीय स्टील और एल्युमीनियम का निर्यात पहले ही 7 अरब डॉलर से गिरकर 5 अरब डॉलर पर आ गया है और भविष्य में यह और भी कम हो सकता है. पार्टी ने चिंता जताई है कि केंद्र सरकार भारतीय निर्यातकों के लिए इस कार्बन टैक्स से छूट पाने में विफल रही है, जिससे FTA से होने वाले संभावित लाभ शून्य हो सकते हैं.
India and the 27-nation European Union first started negotiations for a Free Trade Agreement in June 2007. 16 rounds of negotiations took place but were suspended in May 2013 because of lack of agreement on many important issues. Talks on an FTA remained suspended till June 2022…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) January 28, 2026
जयराम रमेश ने यह भी रेखांकित किया कि इस समझौते के तहत भारत ने 96 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ में कटौती की है, जो किसी भी व्यापारिक भागीदार को दी गई अब तक की सबसे बड़ी छूट है. इससे भारत के व्यापार घाटे के दोगुने होने की आशंका है.
इसके अलावा, कांग्रेस ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र, विशेषकर उभरते इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के भविष्य पर भी चिंता व्यक्त की है. पार्टी का मानना है कि यूरोपीय कारों के लिए बाजार खोलने से घरेलू निर्माताओं को कड़ी चुनौती मिलेगी.
साथ ही, फार्मास्युटिकल क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) और सख्त स्वास्थ्य मानकों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जो भारतीय दवाओं के लिए गैर-टैरिफ बाधाएं बन सकते हैं.
रूस से आयातित कच्चे तेल से बने रिफाइंड ईंधन के निर्यात और उस पर वाशिंगटन के भू-राजनीतिक दबाव को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी है.