फॉर्म 6 में बदलाव पर भड़की कांग्रेस: CEC पर कानून तोड़ने का आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर नियम-कायदों और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े 'फॉर्म 6' में एकतरफा बदलाव करने का गंभीर आरोप लगाया है. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में खुद संज्ञान लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग की है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को देश की जनता का अपमान बताया और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुझाव का समर्थन करते हुए उनके इस्तीफे की मांग उठाई. रमेश का कहना है कि चुनाव आयोग ने घबराकर शुक्रवार देर रात युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने के निर्देश जारी किए. हालांकि, इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्वयं फॉर्म 6 में गैर-कानूनी बदलाव कर पहली बार वोट डालने वाले Gen Z मतदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया था.
फॉर्म 6 के ऑनलाइन प्रारूप में एक नई अनिवार्य शर्त जोड़ी गई है, जिसके तहत आवेदकों से पूछा जा रहा है कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछली विशेष गहन समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थे. कांग्रेस नेता ने इसे पूरी तरह अवैध बताते हुए तीन मुख्य उल्लंघनों का उल्लेख किया:
1- बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदलाव: जुलाई 2026 की शुरुआत में बिना किसी पूर्व सूचना के ऑनलाइन फॉर्म को चुपचाप बदल दिया गया.
2- अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of The People Act, 1950) के तहत फॉर्म 6 में संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, न कि चुनाव आयोग के पास.
3- संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी: निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 (Registration of Electors Rules, 1960) में बिना किसी संशोधन और संसद को सूचित किए बिना यह बदलाव एकतरफा तरीके से लागू किया गया.
जयराम रमेश ने दावा किया कि आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने भी इस बदलाव को निरस्त करने की वकालत की थी ताकि नए मतदाताओं को परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन करने वाले शीर्ष अधिकारी को पद पर रहने का कोई हक नहीं है.
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म 6 में कोई कानूनी संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि केवल आवश्यक दिशा-निर्देशों के तहत एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया है. ऑनलाइन फॉर्म भरते समय जब तक इस हिस्से को पूरा नहीं किया जाता, आवेदन आगे नहीं बढ़ता.
पोल पैनल के अनुसार, बिहार में पिछले साल जून से शुरू हुई एसआईआर कवायद के बाद से 18 से 28 वर्ष के आयु वर्ग के लगभग 2.37 करोड़ नए मतदाताओं को चुनावी मतदाता सूची में जोड़ा जा चुका है.