क्विट इंडिया आंदोलन का RSS ने किया था विरोध- कांग्रेस
नई दिल्ली । डेस्क: क्विट इंडिया आंदोलन की 83वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर इस ऐतिहासिक आंदोलन का विरोध करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने दावा किया कि जब उसके शीर्ष नेता जेलों में बंद थे, तब आरएसएस ने आंदोलन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "1942 में, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान के साथ क्विट इंडिया आंदोलन शुरू हुआ, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की."
उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में कहा, "कांग्रेस के नेतृत्व में असंख्य भारतीय सड़कों पर उतरे और इस आंदोलन ने स्वतंत्रता के लिए एक अविस्मरणीय इतिहास रचा. 'अगस्त क्रांति दिवस' पर हम उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी."
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए कहा, "8 अगस्त 1942 की देर रात को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने क्विट इंडिया प्रस्ताव पारित किया. इसके बाद, महात्मा गांधी ने अपने प्रेरणादायी 'करो या मरो' भाषण के साथ आंदोलन की शुरुआत की."
उन्होंने बताया कि 9 अगस्त 1942 की सुबह, गांधीजी सहित कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. गांधीजी को पुणे के आगा खान पैलेस में 6 मई 1944 तक कैद रखा गया, जबकि जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और अन्य नेताओं को अहमदनगर किले की जेल में 28 मार्च 1945 तक बंद रखा गया.
रमेश ने आगे कहा, "नेहरू के लिए यह नौवीं बार जेल जाना था. 1921 से 1945 के बीच, उन्होंने कुल नौ साल जेल में बिताए. अहमदनगर जेल में ही उन्होंने अपनी अमर कृति 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' लिखी."
उन्होंने आरोप लगाया, "जब पूरा कांग्रेस नेतृत्व जेलों में बंद था और देश स्वतंत्रता के लिए प्रेरित था, तब आरएसएस ने क्विट इंडिया आंदोलन का सक्रिय रूप से विरोध किया. सात साल बाद, 1949 में, इसने भारत के संविधान का भी विरोध किया."
कांग्रेस ने अपने बयान में स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि क्विट इंडिया आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और भारत की आजादी की नींव को मजबूत किया.
पार्टी ने इस अवसर पर देशवासियों से स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद रखने और उनके आदर्शों पर चलने की अपील की.