राजनाथ सिंह के बाबरी मस्जिद बयान पर Cong, BJP में घमासान
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस दावे का खंडन करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल की बेटी मणिबेन पटेल की डायरी के अंशों को एक पुस्तक से साझा किया कि भारत के पहले प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू, बाबरी मस्जिद को सार्वजनिक धन से बनाना चाहते थे. पार्टी ने राजनाथ सिंह से "झूठ" फैलाने के लिए माफी मांगने की भी मांग की.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि रक्षा मंत्री प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ "अपने संबंध सुधारने" के लिए झूठ फैला रहे हैं.
जयराम रमेश ने एक्स पर पुस्तक के प्रासंगिक पृष्ठों के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा, "यहां सरदार पटेल वल्लभभाई पटेल मेमोरियल सोसाइटी द्वारा प्रकाशित सीए आर. एस. पटेल 'आरेश' की पुस्तक 'समर्पित पदछायो सरदारनो', 2025 में पृष्ठ 212-213 पर मणिबेन की मूल डायरी प्रविष्टि गुजराती में दी गई है."
उन्होंने आगे कहा, "मूल डायरी प्रविष्टि में जो कुछ है और राजनाथ सिंह जी और उनके साथी 'विकृत इतिहासकार' जो प्रचारित कर रहे हैं, उसमें बहुत बड़ा अंतर है."
जयराम रमेश ने कहा, "रक्षा मंत्री को केवल प्रधान मंत्री के साथ अपने संबंध सुधारने के लिए, जो झूठ वह फैला रहे हैं, उसके लिए माफी मांगनी चाहिए."
कांग्रेस ने पहले राजनाथ सिंह के इस दावे को कि नेहरू बाबरी मस्जिद को सार्वजनिक धन से बनाना चाहते थे, एक "झूठ" और "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहानी" करार दिया था, और कहा था कि रक्षा मंत्री को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के रास्ते पर नहीं चलना चाहिए.
गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को गुजरात के वडोदरा जिले के साढली गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा था कि नेहरू बाबरी मस्जिद को सार्वजनिक धन से बनाना चाहते थे, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनकी योजनाओं को सफल नहीं होने दिया.
भाजपा ने राजनाथ सिंह के दावों को दोहराते हुए वल्लभभाई पटेल की बेटी की एक पुस्तक का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि पहले प्रधान मंत्री दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों की सुंदरता के बावजूद उनसे "घृणा" भी महसूस करते थे.
भाजपा के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था, "राजनाथ सिंह ने जो कहा उसका स्रोत 'इनसाइड स्टोरी ऑफ सरदार पटेल: डायरी ऑफ मणिबेन पटेल' है."
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया था कि पुस्तक के पृष्ठ 24 पर लिखा है कि नेहरू ने बाबरी मस्जिद का सवाल भी उठाया था, लेकिन सरदार पटेल ने स्पष्ट कर दिया था कि सरकार मस्जिद बनाने पर कोई पैसा खर्च नहीं कर सकती है.