'हिंदू महासभा-मुस्लिम लीग की सांठगांठ से हुआ बंटवारा'- कांग्रेस
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा 'विभाजन भयावहता स्मरण दिवस' के लिए जारी विशेष मॉड्यूल ने भारत के बंटवारे के लिए मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया है. जिस पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मॉड्यूल की सामग्री पर सवाल उठाते हुए बंटवारे का कारण हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की 'जु्गलबंदी' बताया और मॉड्यूल में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों के अभाव की आलोचना की.
खेड़ा ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या मॉड्यूल में 1938 का जिक्र है? गुजरात में साबरमती के तट पर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि हिंदू और मुसलमान एक देश में नहीं रह सकते. 1940 में, इस जु्गलबंदी को आगे बढ़ाते हुए, मुस्लिम लीग के लाहौर सत्र में जिन्ना ने यही बात दोहराई. 1942 में, जब क्विट इंडिया आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रांतीय विधानसभाओं से इस्तीफा दे दिया, तब हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने NWFP, बंगाल, और सिंध में गठबंधन सरकारें बनाईं. सिंध विधानसभा में बंटवारे का प्रस्ताव भी इन्हीं दोनों ने रखा. अगर यह सब मॉड्यूल में नहीं है, तो ऐसी किताब को आग लगा देनी चाहिए. बंटवारा हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की सांठगांठ का नतीजा था. इस इतिहास का खलनायक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है, जिसे पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी.”
NCERT मॉड्यूल में दावा किया गया है कि बंटवारा 'गलत विचारों' का परिणाम था. इसमें कहा गया है कि मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना ने 1940 में लाहौर सम्मेलन में हिंदुओं और मुसलमानों को अलग-अलग धार्मिक दर्शन, सामाजिक रीति-रिवाजों और साहित्य से जोड़ा.
मॉड्यूल में बंटवारे के लिए तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया गया है: जिन्ना, जिन्होंने इसकी मांग की; कांग्रेस, जिसने इसे स्वीकार किया; और माउंटबेटन, जिन्होंने इसे लागू किया.
मॉड्यूल में माउंटबेटन पर सत्ता हस्तांतरण की तारीख को जून 1948 से पहले अगस्त 1947 करने का आरोप है, जिसके कारण सीमा निर्धारण में जल्दबाजी हुई. इसमें कहा गया है, “पंजाब में 15 अगस्त 1947 के दो दिन बाद भी लाखों लोगों को नहीं पता था कि वे भारत में हैं या पाकिस्तान में.”
मॉड्यूल में सरदार वल्लभभाई पटेल के हवाले से कहा गया है कि भारत की स्थिति विस्फोटक हो गई थी और बंटवारा 'कड़वी दवा' थी. जवाहरलाल नेहरू ने इसे 'बुरा' लेकिन 'अनिवार्य' बताया.
महात्मा गांधी के रुख का जिक्र करते हुए मॉड्यूल कहता है कि गांधी बंटवारे के खिलाफ थे, लेकिन कांग्रेस के फैसले का हिंसा से विरोध नहीं किया. मॉड्यूल में यह भी दावा किया गया है कि जिन्ना ने बाद में कहा, “मुझे नहीं लगा था कि बंटवारा होगा. मैंने अपने जीवनकाल में पाकिस्तान देखने की उम्मीद नहीं की थी.”
NCERT ने कक्षा 6-8 और 9-12 के लिए दो अलग-अलग मॉड्यूल जारी किए हैं, जो नियमित पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि परियोजनाओं, पोस्टरों, चर्चाओं और वाद-विवाद के लिए पूरक संसाधन हैं.
दोनों मॉड्यूल की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2021 के उस संदेश से होती है, जिसमें 14 अगस्त को 'विभाजन भयावहता स्मरण दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी.
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मॉड्यूल पर आपत्ति जताते हुए कहा, “मुसलमानों को बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है. उस समय 2-3% मुसलमानों को भी वोट देने का अधिकार नहीं था. NCERT में शम्सुल इस्लाम की किताब 'मुसलिम्स अगेंस्ट पार्टिशन' को शामिल करना चाहिए. जो लोग यहां से भागे, वे भाग गए. जो वफादार थे, वे रुके.”