CJP: प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- मुख्य विपक्षी दलों के प्रति युवाओं का मोहभंग
नई दिल्ली । डेस्क: सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के रूप में उभरे एक अनूठे और व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है. विशेष रूप से जेन-जी (Gen Z) यानी युवा पीढ़ी के बीच इस डिजिटल पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता पर अब देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का तेजी से उभार मुख्यधारा के विपक्षी दलों के प्रति युवाओं के बढ़ते असंतोष और मोहभंग को दर्शाता है.
पूर्व राज्यसभा सांसद चतुर्वेदी ने युवा मतदाताओं की मानसिकता को समझने और नए सिरे से रणनीति बनाने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि युवाओं में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ गुस्सा है, लेकिन वे स्थापित विपक्षी दलों के बजाय एक काल्पनिक डिजिटल पार्टी पर भरोसा करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने मुख्यधारा के विपक्ष को नसीहत दी कि उन्हें भारत के भविष्य और युवाओं के लिए अपनी राजनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए.
STORY | CJP shows GenZ losing hope in most Oppn parties: Sena (UBT) leader
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
Shiv Sena (UBT) leader Priyanka Chaturvedi on Thursday said the Cockroach Janata Party (CJP), which has taken the GenZ imagination by storm, is a sad reflection of them losing hope in most of the current… pic.twitter.com/t6aitbYdBm
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया. कथित तौर पर एक सुनवाई के दौरान फर्जी डिग्री वाले वकीलों की आलोचना करते हुए उनके द्वारा 'परजीवी' और 'कॉकरोच' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने की बात सामने आई थी, हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया.
इसी विवाद के बाद अभिजीत दिपके नामक युवक ने व्यंग्य के रूप में 'कॉकरोच जनता पार्टी' की नींव रखी, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई. इस बीच, गुरुवार को भारत में इस पार्टी के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर रोक लगा दी गई, जिसके बाद 'कॉकरोच इज बैक' नाम से एक नया हैंडल सामने आया है, जिसका टैगलाइन है-'कॉकरोच कभी मरते नहीं'.
अकाउंट ब्लॉक किए जाने और इस आंदोलन के उभार पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इसे बेहद दिलचस्प बताया. थरूर ने सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति, व्यंग्य, हास्य और सार्वजनिक हताशा के लिए जगह होनी चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवाओं की यह डिजिटल ऊर्जा भविष्य में वास्तविक मतदान और राजनीतिक भागीदारी में बदलेगी.
वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे युवाओं की एक नई क्रांति करार दिया, जो नफरत और विभाजन की राजनीति में फंसने से इनकार कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए इस आंदोलन का समर्थन किया और दिपके को कम समय में बड़ी सोशल मीडिया फॉलोइंग हासिल करने के लिए बधाई दी. आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने तो मजाकिया अंदाज में खुद को 'कॉकरोच' बताते हुए व्यवस्था पर तंज कसा.
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सरकार समर्थक और दक्षिणपंथी सोशल मीडिया हैंडल्स ने इसके संस्थापक अभिजीत दिपके को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि दिपके वर्तमान में अमेरिका में रह रहे हैं और जमीनी हकीकत से दूर हैं. साथ ही उनके आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया सेल से जुड़े होने के पुराने इतिहास को उजागर करते हुए इसे आप (AAP) का ही एक छद्म प्रोजेक्ट बताया जा रहा है.
इसके अतिरिक्त, कुछ दावों में यह भी कहा गया है कि इस पेज के अधिकांश फॉलोअर्स पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका से हैं, जिसके जरिए इस पूरे डिजिटल आंदोलन के पीछे किसी 'विदेशी हाथ' होने की आशंका जताई जा रही है. बहरहाल, वकील और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस आंदोलन की सराहना करते हुए युवाओं से अपील की है कि वे इस ऑनलाइन समर्थन को नीट-यूजी पेपर लीक और रोजगार गारंटी जैसे वास्तविक जमीनी मुद्दों की तरफ मोड़ें.