अमेरिका-ईरान युद्ध टलने की उम्मीद: चीन
बीजिंग । डेस्क: वैश्विक तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है, जहां अमेरिका और ईरान ने पूर्ण युद्ध की कगार से पीछे हटते हुए दो सप्ताह की गहन बातचीत और कूटनीतिक वार्ताओं के लिए अपनी सहमति जताई है. इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चीन के आधिकारिक मीडिया आउटलेट 'पीपल्स डेली' के हवाले से खबर है कि दुनिया ने इस समय राहत की सांस ली है, लेकिन भविष्य की चुनौतियां अभी भी काफी गंभीर बनी हुई हैं.
पीपल्स डेली के अनुसार, इन वार्ताओं की अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या अमेरिका और इजराइल शांति के प्रति अपनी वास्तविक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं.
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वर्तमान संकट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय कानून के स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन और बल का गैर-कानूनी प्रयोग है. पिछले 40 दिनों के दौरान वैश्विक समुदाय ने युद्ध की विभीषिका को बेहद करीब से देखा है, जिसमें न केवल बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि हुई है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के नष्ट होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों में अनियंत्रित उछाल भी आया है.
इससे महाद्वीपों की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो गया है. चीनी मीडिया का स्पष्ट मानना है कि सैन्य शक्ति कभी भी स्थायी समाधान नहीं देती, बल्कि यह केवल शत्रुता और हिंसा के चक्र को गहरा करती है.
संकट के इस मोड़ पर चीन ने दोहराया है कि केवल राजनीतिक समाधान और सार्थक बातचीत ही स्थायी शांति का एकमात्र रास्ता है.
पीपल्स डेली के मुताबिक, इन दो हफ्तों के दौरान अमेरिका और इजराइल को सैन्य उकसावे से बचना चाहिए, क्योंकि भरोसे का कोई भी उल्लंघन शांति की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म कर सकता है.
संघर्ष की शुरुआत से ही चीन ने निष्पक्ष और संतुलित रुख अपनाते हुए युद्धविराम के लिए प्रयास किए हैं.
हाल ही में चीन और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तावित पांच-सूत्रीय पहल इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. अंततः, शांति के इस अवसर को वास्तविकता में बदलने के लिए 'जंगल राज' की मानसिकता को त्याग कर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और बहुपक्षवाद का सम्मान करना अनिवार्य है. केवल इन प्रयासों से ही वैश्विक स्तर पर स्थिरता कायम की जा सकती है.