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जशपुर में कोरवा युवती से क्रूर गैंग रेप: दो अपराधी सलाखों के पीछे

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25 अक्टू. 2025, 12:03 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

गैंग रेप
गैंग रेप

जशपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र में एक ऐसी घटना ने समाज को झकझोर दिया है, जहां एक निर्दोष पहाड़ी कोरवा युवती को झाड़-फूंक के नाम पर फंसाकर तीनों अपराधियों ने नृशंसता की हद पार कर दी. पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले युवती को नशीले पदार्थ का सेवन कराकर बेहोश कर दिया, फिर घने जंगल में ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया. 


इस जघन्य कृत्य के बाद, साक्ष्यों को मिटाने के इरादे से उन्होंने युवती के सिर पर भारी पत्थरों से प्रहार कर पहचान मिटाने की कोशिश की, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई.


किसी तरह अपनी जान बचाकर लहू से तरबतर युवती घर लौटी, तो परिवार के लोग हैरान रह गए. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, वही अपराधी भयभीत होकर उसे अपने वाहन में बिठाकर बगीचा के अस्पताल पहुंचा दिए, ताकि संदेह न हो. डॉक्टरों ने इलाज के दौरान गंभीर चोटों के अलावा युवती के गर्भवती होने की पुष्टि की. 


जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि जंगल में हुई इस दुर्घटना के कई महीनों बाद युवती ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया. पीड़िता के परिजनों ने खुलासा किया कि आरोपी लगातार धमकियां देते रहे थे- अगर पुलिस के पास गए तो जान से मार देंगे.


घटना की सूचना मिलते ही पीड़िता के पिता ने बगीचा थाने में तत्काल शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने फौरन संज्ञान लेते हुए दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरा अभी भी फरार है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है. 


मेडिकल परीक्षण और युवती के बयानों पर आधारित सबूतों के चलते अधिकारियों ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें सामूहिक बलात्कार और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर धाराएं जोड़ी जा रही हैं.


यह घटना विशेष रूप से दर्दनाक इसलिए है क्योंकि पहाड़ी कोरवा समुदाय को राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माना जाता है. राज्य सरकार इनके उत्थान के लिए विशेष योजनाएं चला रही है, फिर भी ऐसी अमानवीय वारदातें आदिवासी इलाकों में लगातार बढ़ रही हैं. 


सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि न केवल अपराधियों को कड़ी सजा दी जाए, बल्कि पूरे क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जाए.


पहाड़ी कोरवा जनजाति: एक संक्षिप्त परिचय


पहाड़ी कोरवा जनजाति छत्तीसगढ़ राज्य की एक प्राचीन और विशेष पिछड़ी जनजाति (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) है, जो भारत के मूल निवासियों में से एक मानी जाती है. यह जनजाति मुख्य रूप से घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में निवास करती है, जहां उनकी जीवनशैली प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है. छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी और उत्तरी जिलों जैसे सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, कोरबा और कोरिया में इनकी बस्तियां बिखरी हुई हैं. इनकी संस्कृति, परंपराएं और खानाबदोश जीवनशैली उन्हें अन्य जनजातियों से अलग करती है, लेकिन आधुनिकता के दबाव और वन संसाधनों की कमी के कारण ये आज कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं.


इतिहास और उत्पत्ति

पहाड़ी कोरवा कोरवा जनजाति का एक उप-समूह है, जो सदियों से छत्तीसगढ़ के जंगली और दुर्गम क्षेत्रों में रहते आए हैं. ऐतिहासिक रूप से, ये शिकार और वन उत्पाद संग्रहण पर निर्भर थे, और इन्हें "वनवासी" या "पहाड़ी निवासी" के रूप में जाना जाता है. भारत सरकार ने 75 PVTG समुदायों में से छत्तीसगढ़ की पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों में पहाड़ी कोरवा को शामिल किया है, ताकि इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा सकें. ये जनजाति प्राचीनतम आदिवासी समुदायों में से एक है, जिनकी मौखिक परंपराओं में प्रकृति पूजा और पूर्वजों की कहानियां प्रमुख हैं.


जनसंख्या और वितरण

2015-16 के एक आधारभूत सर्वेक्षण के अनुसार, पहाड़ी कोरवा की कुल जनसंख्या लगभग 44,026 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 22,196 और महिलाओं की 21,830 है. ये आंकड़े छत्तीसगढ़ के सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर और कोरिया जिलों पर आधारित हैं. हालांकि, समय के साथ इनकी जनसंख्या में कमी आई है, जो मुख्यतः वन कटाई, स्वास्थ्य समस्याओं और प्रवास के कारण है. राज्य की कुल अनुसूचित जनजाति आबादी का लगभग 30.62% हिस्सा आदिवासी समुदायों का है, जिसमें पहाड़ी कोरवा एक महत्वपूर्ण भाग हैं.


संस्कृति और जीवनशैली

पहाड़ी कोरवा की जीवनशैली आज भी आधुनिकता से काफी दूर है. ये बांस और पत्तों से बने अस्थायी घरों (घोंघरा) में रहते हैं और वन उत्पाद जैसे महुआ, तेंदू पत्ता और शिकार पर निर्भर हैं. उनकी प्रथाओं में कई अनोखे रिवाज शामिल हैं:


धार्मिक मान्यताएं: प्रकृति पूजा प्रमुख है, जहां पेड़, नदियां और पहाड़ों को देवता माना जाता है. वे "सरना" और "मांद" जैसे स्थानों पर पूजा करते हैं.


वैवाहिक परंपराएं: विवाह सरल और सामुदायिक होते हैं, लेकिन आधुनिक प्रभाव से कुछ परिवर्तन आ रहे हैं, जैसे दहेज-मुक्त विवाह और अंतर-जनजातीय विवाह.


अनोखी प्रथा: परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु पर पूरा परिवार घर छोड़कर नया स्थान बसाता है, ताकि बुरी आत्मा का प्रभाव न रहे. यह परंपरा आज भी कोरबा क्षेत्र में प्रचलित है.


कला और नृत्य: वे लोकगीतों और नृत्यों के माध्यम से अपनी कहानियां सुनाते हैं, जो मुख्यतः कृषि चक्र और शिकार से जुड़े होते हैं.


वर्तमान चुनौतियां और सरकारी प्रयास

हाल के वर्षों में, कई पहाड़ी कोरवा परिवार पहाड़ों से नीचे उतरकर मुख्यधारा में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकारी सहायता की कमी के कारण कई वापस लौट चुके हैं. स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की कमी प्रमुख समस्याएं हैं. सरकार ने इनके लिए विशेष योजनाएं शुरू की हैं, जैसे आवास, स्वास्थ्य शिविर और वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि पट्टे. फिर भी, जागरूकता अभियान और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता बनी हुई है.


पहाड़ी कोरवा न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक भी. इनके संरक्षण से आदिवासी विरासत को मजबूत किया जा सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP