छत्तीसगढ़ में अब जल्द पड़ेगी कड़ाके की ठंड
रायपुर । संवाददाता: बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान 'दितवाह' अब काफी कमजोर हो चुका है, जिसके कारण छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य बना हुआ है. हालांकि, बस्तर संभाग के कुछ इलाकों में बुधवार को हल्की बारिश होने की संभावना अभी भी है.
मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के कारण अगले दो दिनों तक राज्य के न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद पारा तेजी से गिरेगा और कड़ाके की ठंड पड़ने की उम्मीद है.
मौसम विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटों में दुर्ग में राज्य का सर्वाधिक तापमान 29.4 दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर 10.4 के साथ सबसे ठंडा रहा. पेंड्रा समेत उत्तरी जिलों में सुबह के समय हल्का कोहरा देखा गया, जहां न्यूनतम तापमान 11 तक पहुंच गया.
सरगुजा संभाग में ठिठुरन बनी हुई है. वाड्रफनगर में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता 100 मीटर तक कम हो गई, और ग्रामीण ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी- मलेरिया और मौसमी बीमारियों का खतरा, तापमान में आ रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है. अधिकारियों ने निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और ठंडी हवाओं के दौरान पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है, क्योंकि तापमान में बदलाव से हाइपोथर्मिया, मौसमी फ्लू और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा तापमान गर्म दिन और ठंडी रातें मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल हैं, जिससे ग्रामीण और जंगली इलाकों में मलेरिया संचरण का जोखिम बढ़ सकता है. डॉक्टरों ने लोगों को मच्छरदानी का उपयोग करने, जल जमाव रोकने, शाम को फुल-स्लीव कपड़े पहनने और बुखार, ठंड लगना या सिरदर्द होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है.
स्वास्थ्य पेशेवरों ने सुझाए उपाय
नाक बंद होने पर भाप लेना, गले में खराश के लिए गर्म नमक-पानी से गरारे करना, साइट्रस फल और आंवला जैसे विटामिन-सी से भरपूर आहार लेना, सर्दी के लक्षणों को कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए तुलसी-अदरक की चाय या हर्बल काढ़ा पीना.
नवंबर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड- मौसम विज्ञान के अभिलेखागार बताते हैं कि नवंबर महीने में मौसम का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.6, 2 नवंबर 1935 को दर्ज किया गया था. जबकि 22 नवंबर 1883 को 8.3 के साथ यह अब तक की सबसे ठंडी नवंबर की रात रही है.
नवंबर में सबसे भारी मासिक वर्षा 1924 में 138.2 मिमी दर्ज की गई थी, और एक दिन में सबसे अधिक बारिश 70.4 मिमी 2 नवंबर 1930 को हुई थी.