छत्तीसगढ़: मायावती ने कानून व्यवस्था, गरीबी और निजीकरण पर सरकार को घेरा
लखनऊ । डेस्क: बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की चार बार की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात की पार्टी इकाइयों की विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. छत्तीसगढ़ के संदर्भ में, मायावती ने राज्य में व्यापक गरीबी, बेरोजगारी और खराब कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की.
बसपा प्रमुख ने राज्य सरकारों पर 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के संवैधानिक सिद्धांतों से भटकने और कुछ निहित स्वार्थों को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक और जाति-आधारित हिंसा की बढ़ती घटनाएँ लोगों के विश्वास को कम कर रही हैं, और सरकारों को न्याय बहाल करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए.
मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों की भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर लगाम लगाने में विफलता के लिए आलोचना की. उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी संस्थाओं को सौंपना इन समस्याओं का समाधान नहीं है, बल्कि सरकारें लोगों के वास्तविक मुद्दों को संबोधित करने के बजाय संकीर्ण राजनीतिक लाभ में अधिक रुचि रखती हैं.
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अम्बेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए पूरे समर्पण के साथ काम करने का आग्रह किया, जो लोगों और राष्ट्र के सच्चे कल्याण के लिए आवश्यक है. कार्यकर्ताओं को बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि रैली में उनकी 'मिशनरी प्रतिबद्धता' के लिए सराहना करते हुए, उन्होंने आह्वान किया कि वे 'बहुजन समाज' को उत्पीड़ित वर्ग से 'शासक वर्ग' में बदलने के लक्ष्य को पूरा करें.
अंत में, मायावती ने घोषणा की कि 6 दिसंबर, 2025 को डॉ. बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि छत्तीसगढ़ सहित सभी पाँच राज्यों में पूरी मिशनरी भावना के साथ मनाई जाएगी, जिसका उद्देश्य अंबेडकर के संदेश का ईमानदारी से प्रसार करना और पार्टी के सामाजिक आंदोलन को मजबूत करना होगा.