अनोखी परंपरा: 100 साल से यहां नहीं जली होली, रंग खेलने पर भी है पाबंदी
कोरबा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित धमनागुड़ी और खरहरी गांव अपनी एक बेहद अजीबोगरीब परंपरा के लिए पहचाने जाते हैं. जहां पूरे देश में होली के दौरान हुड़दंग और रंगों की बौछार होती है, वहीं इन गांवों में सन्नाटा पसरा रहता है. यहां के ग्रामीण न तो होलिका दहन करते हैं और न ही एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं.
करीब एक सदी से चली आ रही इस परंपरा के पीछे गहरी आस्था और अनहोनी का खौफ छिपा है. स्थानीय बुजुर्गों और बैगाओं द्वारा देव स्थल पर केवल पूजा-अर्चना कर शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार की औपचारिकता पूरी की जाती है, लेकिन अग्नि प्रज्वलन और रंग खेलने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है.
इस परंपरा को लेकर ग्रामीणों में एक पुरानी दहशत भी जुड़ी है. बताया जाता है कि लगभग नौ साल पहले एक परिवार ने इस रीत को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन रंग खेलने के कुछ ही समय बाद उनके घर में रहस्यमयी तरीके से आग लग गई.
इस घटना के बाद से ग्रामीणों का विश्वास और कड़ा हो गया है कि होली खेलने से गांव पर कोई बड़ी विपत्ति आ सकती है.
मर्यादा का आलम यह है कि यदि कोई व्यक्ति गांव के बाहर होली खेलकर वापस लौटता है, तो उसे गांव की सीमा में प्रवेश करने से पहले शरीर से सारा रंग धोना पड़ता है. नियमों की इसी सख्ती और पूर्वजों की मान्यताओं के कारण इन गांवों में आज तक होली को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ और ग्रामीण इसे अपनी सुरक्षा का कवच मानते हैं.