HC ने पूर्व बैंक मैनेजर की जमानत याचिका खारिज की
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक की दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिन पर मुद्रा योजना के तहत ग्राहकों के खातों से 1 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के गबन का आरोप है.
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की अदालत ने प्रथम दृष्टया गबन और आरोपी के बेईमान इरादों के सबूतों का हवाला देते हुए जमानत याचिका खारिज की.
नदिया, पश्चिम बंगाल के निवासी नियोजित बिश्वास, रायपुर के डोंडेखुर्द शाखा के शाखा प्रबंधक थे. उन पर विभिन्न ग्राहक खातों से 2.13 करोड़ रुपये का गबन करने का आरोप है, जिसमें से उन्होंने 19.90 लाख रुपये लौटाए.
अभियोजन के अनुसार, बिश्वास ने आरटीजीएस/एनईएफटी का उपयोग करके राशि को अपने निजी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते में स्थानांतरित किया. उनके खिलाफ वर्तमान बकाया राशि 1.08 करोड़ रुपये है.
हाईकोर्ट ने कहा कि बिश्वास को सार्वजनिक धन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं. न्यायाधीश ने यह भी बताया कि आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष किए गए वादे के अनुसार शेष राशि जमा नहीं की.
आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि बिश्वास को झूठा फंसाया गया और उनके परिवार ने ऋण लेकर 73.50 लाख रुपये जमा किए.
बैंक के वकील ने तर्क दिया कि बिश्वास ने ग्राहकों की सहमति के बिना मुद्रा योजना के तहत उनकी क्रेडिट सीमा बढ़ाकर गबन को सुगम बनाया.
बिश्वास ने 12 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आत्मसमर्पण किया था.
उनकी पहली जमानत याचिका वापस ले ली गई थी, जिसमें बाद में नई याचिका दायर करने की अनुमति दी गई थी.
मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दायर किया जा चुका है.