HC ने दुर्घटना मृत्यु मामले में मुआवजे को बढ़ाया
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को एक महत्वपूर्ण फैसले में रायपुर में 2012 में हुई एक ट्रैक्टर दुर्घटना में मृतक जीतू जांगड़े के परिवार को दी जाने वाली मुआवजा राशि को 8.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.80 लाख रुपये कर दिया. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया.
कोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के तहत उचित और यथोचित मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित किया और कहा कि प्रक्रियात्मक तकनीकी कारणों, जैसे क्रॉस-अपील या आपत्ति दाखिल न करने, के आधार पर मुआवजा नहीं रोका जा सकता.
दुर्घटना 14 मई 2012 को मुजगहन- सियोनी रोड पर हुई थी, जिसमें 35 वर्षीय जीतू जांगड़े की ट्रैक्टर (CG-04-ZQ-1697) और ट्रॉली (CG-10-A-0013) के पलटने से मृत्यु हो गई थी. ट्रैक्टर को लापरवाही और तेजी से चलाने के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें वाहन सड़क किनारे गड्ढे में गिर गया.
जांगड़े, जो वाहन में फंस गए थे, अगले दिन रायपुर के डॉ. भीम राव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई. इस मामले में टिकरापारा पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 279, 338 और 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.
2018 में, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT), रायपुर ने मृतक की विधवा, छह नाबालिग बच्चों और वृद्ध पिता को 9% वार्षिक ब्याज के साथ 8,30,400 रुपये का मुआवजा प्रदान किया था. यह दायित्व चालक, मालिक और बीमा कंपनी पर संयुक्त रूप से निर्धारित किया गया था.
ओरिएंटल इंश्योरेंस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि मृतक ट्रैक्टर में अनधिकृत यात्री था, क्योंकि उनकी "केवल एक्ट" पॉलिसी में केवल चालक को कवर किया गया था और अतिरिक्त यात्रियों के लिए कोई प्रीमियम नहीं दिया गया था.
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि जीतू जांगड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद उतारने के लिए कृषि कार्य हेतु यात्रा कर रहे थे और ट्रॉली में बैठे थे, इसलिए पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ था. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दावेदारों द्वारा क्रॉस-अपील दाखिल न करने के बावजूद, वह उचित मुआवजा बढ़ाने का अधिकार रखता है.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रणय सेठी, मैग्मा जनरल इंश्योरेंस और सुरेखा बनाम संतोष जाधव के फैसलों का हवाला देते हुए मुआवजे की पुनर्गणना की. मृतक की काल्पनिक आय 48,000 रुपये वार्षिक निर्धारित की गई, जिसमें 40% भविष्य की संभावनाओं के लिए जोड़ा गया, 1/5वां हिस्सा व्यक्तिगत खर्चों के लिए काटा गया और 16 का गुणक लागू किया गया, जिससे आय का नुकसान 8.60 लाख रुपये तय हुआ.
इसके अतिरिक्त, आठ आश्रितों के लिए 3.84 लाख रुपये कंसोर्टियम के रूप में, 18,000 रुपये संपत्ति के नुकसान के लिए और 18,000 रुपये अंतिम संस्कार के लिए दिए गए. इस प्रकार, कुल मुआवजा 12,80,160 रुपये निर्धारित किया गया, जो MACT के मुआवजे से 4,49,760 रुपये अधिक है. यह राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ देय होगी.
हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस को 60 दिनों के भीतर राशि जमा करने और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), रायपुर को दावेदारों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि वितरित करने का निर्देश दिया.