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छत्तीसगढ़ में हाथी का हंगामा, 48 घंटे में 4 मौत

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31 जुल. 2025, 01:47 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

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अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुरगुजा संभाग में हाथियों के हमलों ने दो दिनों में चार लोगों की जान ले ली है. जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई है और वन विभाग के अधिकारी सतर्क हो गये हैं.


वन अधिकारियों के अनुसार, एक अकेला हाथी, जो अपने झुंड से अलग हो गया है, लुंड्रा वन क्षेत्र के सितापुर और देवगढ़ सहित कई गांवों में कहर बरपा रहा है. इस हाथी ने कई लोगों को कुचलकर मार डाला, जिसमें एक महिला और एक युवा लड़की भी शामिल हैं. इससे राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर नई चिंतायें पैदा हो गई हैं.


गुरुवार को, 60 वर्षीय राम कोरवा और उनकी 35 वर्षीय बेटी प्यारी को लुंड्रा वन क्षेत्र के असकला गांव में पौधे रोपने के बाद घर लौटते समय एक अकेले नर हाथी ने लगभग 7 बजे शाम को हमला कर दिया. उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन हमले से बच नहीं सके और अंततः उनकी मृत्यु हो गई.


इससे एक दिन पहले, बुधवार को सुबह लगभग 4 बजे, बकिला गांव में एक अकेले नर हाथी ने कहर बरपाया. उसने सनमेत बाई को कुचल दिया, जो अपने घर के पास जंगल से अचानक निकले हाथी का सामना करने के बाद अपने पति नेहरू कंवर के साथ अलग-अलग दिशाओं में भागने की कोशिश कर रही थी.


गुरुवार को ही, देवगढ़ बखरीपारा के 55 वर्षीय मोहर साय पैकरा को एक मादा हाथी और उसके बच्चे ने मार डाला. वह सुबह लगभग 6 बजे अपने खेत में था जब यह घटना हुई. इन लगातार हो रही मौतों ने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है.


वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एक अकेला हाथी, जो अपने झुंड से अलग हो गया है, हाल की मौतों के लिये जिम्मेदार है. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह जानवर कई दिनों से मानव बस्तियों के पास भटक रहा है.


एक वन विभाग के अधिकारी ने कहा, “यह हाथी लुंड्रा और सितापुर क्षेत्रों में दहशत पैदा कर रहा है. इसने बिना उकसावे के हमला किया और अब तक चार लोगों की जान ले चुका है.”


विभाग ने त्वरित प्रतिक्रिया दल भेजे हैं और वन रेंजरों को हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिये तैनात किया है. जानवर को कम आबादी वाले वन क्षेत्रों की ओर सुरक्षित रूप से ले जाने के प्रयास किये जा रहे हैं.


वन अधिकारियों ने बताया कि एक अकेला नर हाथी कई दिनों से लुंड्रा क्षेत्र में आतंक मचा रहा है. माना जा रहा है कि यह बलरामपुर से जिले में प्रवेश करने के बाद धौरपुर, लुंड्रा, चंद्रा, उदारी और असकला के रास्ते चिरगा पहुंचा है.


सीतापुर क्षेत्र में एक मादा हाथी और उसके बच्चे की मौजूदगी भी सामने आई है, जो अपने आप में अनूठी घटना है. वन अधिकारियों का कहना है कि मादा हाथी संभवतः अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये उग्र हो गई. सामान्य तौर पर, हाथी मुख्य रूप से ललितपुर में देखे जाते थे.


सुरगुजा के डीएफओ अभिषेक जोगावत, जिन्होंने चार मौतों की पुष्टि की, ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि 10 किलोमीटर का क्षेत्र निगरानी में है और निवासियों को जंगल में जाने या हाथियों को परेशान करने से बचने की सलाह दी गई है.


इन घटनाओं के बाद, सुरगुजा और लुंड्रा वन क्षेत्रों के अधिकारियों, जिसमें डीएफओ और वन रेंजर शामिल हैं, तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे. वन विभाग वर्तमान में आवश्यक पंचनामा तैयार कर रहा है और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजे की कार्रवाई शुरू कर रहा है.


खतरे को और बढ़ाते हुये, मैनपाट के आबादी वाले क्षेत्रों में एक अलग हाथी समूह के घूमने की भी खबर है, जो निवासियों के लिए खतरा पैदा कर रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP