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छत्तीसगढ़: एक गांव जहां तारीख नहीं, दिन तय करता है रंगों का त्योहार!

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03 मार्च 2026, 04:12 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

होली
होली

रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सटे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बसा साल्हेओना गाँव अपनी एक अनूठी और रहस्यमयी परंपरा के कारण सुर्खियों में बना रहता है. देश के अन्य हिस्सों में जहाँ पंचांग की तिथियों के अनुसार रंगों का उत्सव मनाया जाता है, वहीं इस गाँव के लोग आज भी पुरानी मान्यताओं के अनुसार केवल शनिवार या मंगलवार को ही होली खेलते हैं. 


लगभग एक सदी से चली आ रही इस रस्म के पीछे एक खौफनाक अतीत छिपा है, जिसे गाँव की नई पीढ़ी भी पूरी शिद्दत से मानती है.

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स्थानीय निवासियों और बुजुर्गों के अनुसार, दशकों पहले होली के अवसर पर गाँव में रहस्यमयी तरीके से आग लग जाया करती थी. एक बार आग भड़कती तो देखते ही देखते पूरे गाँव को अपनी चपेट में ले लेती थी. लगातार कई वर्षों तक हुए इस जान-माल के नुकसान से डरे ग्रामीणों ने जब ब्रह्म अवधूत साधुओं की शरण ली, तो उन्हें विशेष शांति अनुष्ठान और दिन विशेष पर पूजा करने की सलाह दी गई. 


साधुओं के निर्देशानुसार, तब से गाँव में होली तभी मनाई जाती है जब त्योहार का दिन मंगलवार या शनिवार को पड़े. यदि होली किसी अन्य दिन हो, तो पूरे गाँव में सन्नाटा पसरा रहता है और कोई भी रंग नहीं खेलता.


परंपरा के अनुसार, त्योहार वाले दिन गाँव की देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना और हवन किया जाता है. करीब दो घंटे तक चलने वाले इस अनुष्ठान के बाद ही ग्रामीणों को रंग खेलने की अनुमति होती है. 


गाँव के युवा और पंच बताते हैं कि यह केवल एक रीति नहीं, बल्कि अनहोनी से बचने का एक विश्वास है. यही वजह है कि साल्हेओना की 2500 की आबादी आज भी अपने पूर्वजों के इस संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है. Symbolic Photo

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP