सावधान! लंबे समय का तनाव बन सकता है पुरुष बांझपन का कारण
नई दिल्ली । डेस्क: लंबे समय तक तनाव में रहने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है. पिछले चार दशकों से वैज्ञानिक यह तो जानते थे कि मानसिक तनाव पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, लेकिन यह 'कैसे' होता है, इसकी सटीक जानकारी अब तक एक पहेली बनी हुई थी. भारत के दो शोधकर्ताओं ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है.
रायबरेली का महत्वपूर्ण शोध 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च', रायबरेली की सहायक प्रोफेसर सपना कुशवाहा और शोधकर्ता इतिश्री दुबे के एक हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि लंबे समय तक रहने वाला मनोवैज्ञानिक तनाव 'ब्लड-टेस्टिस बैरियर' को नष्ट कर देता है. यह एक अत्यंत सूक्ष्म झिल्ली होती है जो विकसित हो रहे शुक्राणुओं को रक्त में मौजूद हानिकारक तत्वों से बचाती है.
चूहों पर किए गए इस प्रयोग में पाया गया कि तनाव सीधे तौर पर इस सुरक्षा कवच के एक मुख्य 'एंकर प्रोटीन' को निष्क्रिय कर देता है. शोध के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
तनाव का असर तुरंत नहीं होता. प्रयोग के शुरुआती 8 हफ्तों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन 14वें हफ्ते तक आते-आते स्पर्म काउंट, उनकी गतिशीलता और DNA की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई.
शोध में पहली बार यह दिखाया गया है कि तनाव के कारण वह प्रोटीन काम करना बंद कर देता है जो इस सुरक्षा दीवार को थामे रखता है.
शोधकर्ताओं ने पाया कि तनाव के दौरान अंडकोष के ऊतकों में 'इरिसिन' नामक हार्मोन का स्तर कम हो जाता है. यह खोज भविष्य में बांझपन के इलाज के लिए नई राहें खोल सकती है.
दिलचस्प बात यह रही कि 18 हफ्तों तक तनाव जारी रखने के बाद नुकसान और अधिक नहीं बढ़ा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह शरीर की एक 'एडेप्टिव रिस्पॉन्स' प्रणाली है, जिसमें शरीर लंबे समय तक चलने वाली चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करता है.
विशेषज्ञों की राय बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के फार्माकोलॉजी विशेषज्ञ विकास मिश्रा के अनुसार, "यह अध्ययन उस तंत्र को समझने में मदद करता है जिसके जरिए मानसिक तनाव शारीरिक नुकसान में बदल जाता है. जब हमें नुकसान की सटीक वजह पता होती है, तभी उसका सही उपचार संभव हो पाता है."
यह शोध हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल 'रिप्रोडक्टिव साइंसेज' में प्रकाशित हुआ है.