बजट 2026-27: शेयर बाज़ार में हाहाकार, सरकार का ज़ोर दीर्घकालिक विकास पर
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय बजट 2026 में जहां सरकार ने दीर्घकालिक आर्थिक विकास, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक आधारित निवेश पर जोर दिया है, वहीं बजट के तुरंत बाद शेयर बाज़ार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. शेयर बाज़ार से जुड़े कुछ लेन-देन पर टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते रविवार को सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए.
हालांकि बाज़ार की इस तीखी प्रतिक्रिया के बावजूद उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों ने बजट को विकासोन्मुख, संतुलित और सुधारवादी बताया.
आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स के डिप्टी डायरेक्टर जनरल संजय मेहता ने बजट को “बहुत सकारात्मक और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया” करार दिया.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार, सप्लाई चेन और संसाधनों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, ऐसे में भारत को दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा.
सरकार ने अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है.
बजट का केंद्र मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रहा, जिसे मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
इसके लिए फार्मा, सेमीकंडक्टर, रेयर-अर्थ मैग्नेट, केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, टेक्सटाइल और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट समेत सात क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. एमएसएमई को भी विस्तार, आधुनिकीकरण और निर्यात बढ़ाने के लिए सहायता दी जाएगी.
सरकार ने सार्वजनिक निवेश को 9 प्रतिशत बढ़ाकर रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जिसका बड़ा हिस्सा रेलवे, सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डों, स्वास्थ्य और मेडिकल रिसर्च में खर्च होगा.
वहीं, शेयर बाज़ार में बढ़े टैक्स और सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स के चलते निवेशकों में असंतोष देखा गया.
सरकार का कहना है कि शेयर बाज़ार में टैक्स बढ़ाने का मकसद सट्टेबाज़ी पर लगाम लगाना और आम निवेशकों को सुरक्षा देना है.
कुल मिलाकर बजट ने अल्पकालिक बाज़ार उतार-चढ़ाव से परे, भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.