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बंबई HC: वोटर लिस्ट से नागरिकों के नाम हटाने का क्या मकसद है?

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06 अक्टू. 2026, 03:51 AM 3 मिनट में पढ़ें 6

हाईकोर्ट
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पणजी । डेस्क: बंबई उच्च न्यायालय ने गोवा की मतदाता सूची से एक ही परिवार के सदस्यों के नाम हटाए जाने के मामले में भारत निर्वाचन आयोग (EC) को कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने आयोग से स्पष्ट सवाल किया कि भारतीय नागरिक होने और पते में बदलाव के लिए आधिकारिक रूप से ‘फॉर्म 8’ जमा करने के बावजूद परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच सदस्यों के नाम मतदाता सूची से कैसे गायब हो गए.


जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की दो जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने टिप्पणी की कि निर्वाचन आयोग का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि केवल भारतीय नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची में शामिल रहें. पीठ ने कहा कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से असली नागरिकों को ही वोट देने के अधिकार से बेदखल कर दिया जाएगा, तो इस तरह की कवायद का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा.

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उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य मकसद यह जांचना है कि कोई मतदाता भारत का नागरिक है या नहीं, न कि केवल यह देखना कि वह किसी विशेष स्थान पर उपस्थित है या नहीं. अदालत ने मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21 का हवाला देते हुए आयोग को याद दिलाया कि हर प्रक्रिया की जांच मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर होनी चाहिए, न कि ड्राफ्ट रोल के आधार पर. ऐसा न करने से मतदाता के सामने भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है और वह ऐसी विकट परिस्थिति में फंस जाता है जहां से निकलना असंभव हो जाता है.


सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से यह भी पूछा कि क्या सालगांवकर परिवार का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था? 


इस पर चुनाव आयोग के वकील गौरिश अग्नि ने तर्क दिया कि आयोग के पास संबंधित मतदाताओं के नए विवरण उपलब्ध नहीं थे, इसलिए नियमानुसार हर स्तर पर नोटिस बोर्ड पर सूचनाएं प्रकाशित की गई थीं. चुनाव आयोग के वकील ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट रोल से हट चुके हैं और जिन्होंने प्रगण प्रपत्र (Enumeration Form) नहीं भरा है, उनके ‘फॉर्म 8’ पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मतदाताओं को नए क्षेत्र में नामांकन के लिए ‘फॉर्म 6’ भरना चाहिए था.


हालांकि, उच्च न्यायालय ने आयोग की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया. पीठ ने कहा कि ‘फॉर्म 8’ पते में संशोधन और ड्राफ्ट रोल में सुधार के लिए ही होता है. वहीं ‘फॉर्म 6’ का उपयोग नया नाम जोड़ने के लिए किया जाता है. अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता है और किसी दूसरी जगह स्थानांतरित हुआ है, तो उससे ‘फॉर्म 6’ भरवाना एक तरह से गलत घोषणा करवाने जैसा है. 


यदि मतदाता किसी ऐसे स्थान के लिए फॉर्म भरता है जहां वह वर्तमान में नहीं रह रहा है, तो वह कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ सकता है. अदालत ने कहा कि कोई भी जागरूक नागरिक ऐसे प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेगा और न ही आयोग को उनसे ऐसा करने की अपेक्षा रखनी चाहिए. उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को प्रगण प्रपत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को जारी रहेगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP