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BMS ने की मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा संहिता लागू करने की मांग

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25 अग. 2025, 07:48 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

बीएमएस
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भोपाल । डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की श्रमिक शाखा, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने केंद्र सरकार से मजदूरी संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता को तत्काल लागू करने की मांग की है. इसके साथ ही, संगठन ने भारतीय श्रम सम्मेलन, जो श्रम और रोजगार मंत्रालय का सर्वोच्च त्रिपक्षीय निकाय है, को जल्द से जल्द आयोजित करने का आग्रह किया है. ये मांगें बीएमएस की 159वीं केंद्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में उठाई गईं, जो 22 से 24 अगस्त तक भोपाल में आयोजित हुई थी.


बीएमएस के अध्यक्ष हिरण्मय पांड्या, जो इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, ने कहा कि मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा संहिताएं ऐतिहासिक कानून हैं, जो सामान्य श्रमिकों के लिए सबसे अधिक लाभकारी हैं. 


उन्होंने कहा, "इसी कारण बीएमएस इनका तत्काल कार्यान्वयन चाहता है. हालांकि, हम औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों की संहिता में श्रमिकों के हितों के खिलाफ कई खंडों का विरोध करते हैं." 


पांड्या ने सरकार से श्रम संहिताओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और त्रिपक्षीय भागीदारों का विश्वास जीतने की अपील की.


चार नई श्रम संहिताओं में से ये दो संहिताएं मौजूदा कानूनों को सरल और समेकित करने के लिए बनाई गई हैं, ताकि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को लाभ मिल सके. 


मजदूरी संहिता न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करती है, जबकि सामाजिक सुरक्षा संहिता सभी प्रकार के श्रमिकों, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर शामिल हैं, के लिए भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ और बीमा जैसे लाभों का दायरा बढ़ाती है.


पांड्या ने कहा, "भारतीय श्रम सम्मेलन का आखिरी आयोजन 2015 में हुआ था. यह श्रम मंत्रालय का सर्वोच्च त्रिपक्षीय निकाय है और भारतीय लोकतंत्र का एक शानदार योगदान है. 


2015 के बाद, रोजगार की दुनिया में तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढांचे और डिजिटल परिवर्तन के कारण कई आयामों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं. सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में भी बदलाव हुए हैं. श्रम मुद्दों पर उच्चतम निर्णय लेने वाले निकाय में चर्चा की तत्काल आवश्यकता है." 


उन्होंने श्रम मंत्रालय से पहल करके जल्द से जल्द भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाने का आग्रह किया.


बीएमएस ने अपनी बैठक में हरियाणा सरकार के कौशल विकास योजना के तहत अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने के फैसले का स्वागत किया. 


साथ ही, संगठन ने महिला और बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत शुरू की गई चेहरा पहचान प्रणाली पर चिंता जताई. 


पांड्या ने कहा, "इस प्रणाली ने कार्यान्वयन स्तर पर कई व्यावहारिक समस्याओं के कारण देशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मुश्किलें पैदा की हैं. यह जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को परेशान करने का एक और उपकरण बन गया है." बीएमएस ने इस नीति को वापस लेने की मांग की है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP