बंगाल चुनाव: आजादी के बाद पहली बार 91.78% रिकॉर्ड मतदान
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में लोकतंत्र का एक अभूतपूर्व उत्सव देखने को मिला है, जिसने पिछले सात दशकों के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को संपन्न हुए पहले चरण के मतदान में बंगाल ने 91.78 प्रतिशत की भारी वोटिंग दर्ज की है. यह आंकड़ा 1947 में देश की आजादी के बाद से राज्य में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है.
इससे पहले बंगाल में सर्वाधिक मतदान साल 2011 में देखा गया था, जब 84.72 प्रतिशत वोटिंग हुई थी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने दशकों पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था.
बंगाल के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में भी रिकॉर्ड तोड़ उत्साह देखा गया, जहाँ 84.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2011 के पिछले रिकॉर्ड 78.29 प्रतिशत से कहीं अधिक है.
बंगाल के चुनावी परिदृश्य का विश्लेषण करें तो चुनाव आयोग के नेट ऐप पर रात 9:55 बजे तक 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान प्रतिशत 92.56 तक पहुंचता दिखाई दे रहा था. दिलचस्प बात यह है कि राज्य के केवल तीन जिलों कालिम्पोंग, दार्जिलिंग और पश्चिम बर्धमान में मतदान 90 प्रतिशत से कम रहा, जिसमें कालिम्पोंग 83 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे था. इसके विपरीत, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में, जहाँ मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं को चिह्नित किया गया था, वहां 93 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया.
बंगाल का चुनावी इतिहास बताता है कि 1950 और 1960 के दशक में मतदान केवल 43-47 प्रतिशत के आसपास रहता था. 1977 में जब वाम मोर्चा सत्ता में आया, तब यह आंकड़ा 56.15 प्रतिशत था. 1990 के दशक में पहली बार मतदान ने 80 प्रतिशत की सीमा को पार किया. इस बार के मतदान ने उन सभी पुराने मानकों को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है.
इस भारी मतदान के पीछे कई महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं. एक प्रमुख कारण मतदाता सूची में हुआ बदलाव है; इस बार 2024 के लोकसभा चुनावों की तुलना में लगभग 91 लाख कम मतदाता थे, जिससे प्रतिशत में उछाल आया.
इसके अलावा, प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या में घर वापसी ने भी इसमें भूमिका निभाई. बताया जा रहा है कि कई मतदाता भविष्य में मताधिकार छीनने या नागरिकता संबंधी पहचान के डर से मतदान करने पहुंचे. राजनीतिक मोर्चे पर, भारी मतदान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जादवपुर में एक जनसभा के दौरान विश्वास जताया कि तृणमूल कांग्रेस पहले चरण में ही जीत हासिल कर चुकी है और अगले चरण में विपक्ष का सफाया कर देगी. दूसरी ओर, भवानीपुर से उम्मीदवार और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 152 सीटों में से 125 सीटें भाजपा की झोली में जा रही हैं और तृणमूल सरकार की विदाई तय है.
शांति व्यवस्था के लिहाज से भी यह चुनाव पिछले वर्षों की तुलना में काफी अलग रहा. बंगाल के हिंसक चुनावी इतिहास के उलट, इस बार के मतदान के दौरान कहीं से भी गोलीबारी की खबर नहीं आई.
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय बलों द्वारा उत्पीड़न और ईवीएम में खराबी को लेकर 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कृष्णानगर की रैली में रिकॉर्ड मतदान की भविष्यवाणी की थी, जो सच साबित होती दिख रही है. अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण और उसके बाद 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी.