आयुष सुरक्षा पोर्टल भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल
नई दिल्ली । डेस्क: आयुर्वेद, सिद्ध, और यूनानी दवाओं पर भ्रामक विज्ञापनों और स्वास्थ्य दावों पर अंकुश लगाने के लिये केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने 'आयुष सुरक्षा पोर्टल' की शुरुआत की है. यह पोर्टल https://www.ayushsuraksha.com/ देश में भ्रामक विज्ञापनों और दवाओं से होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं (एडीआर) को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
लंबे समय से आयुर्वेद, सिद्ध, और यूनानी दवा कंपनियां बिना वैज्ञानिक प्रमाण के रक्तचाप, मधुमेह, बुखार, मिर्गी, और ल्यूपस जैसे रोगों के इलाज का दावा करती रही हैं. ये कंपनियां अपने उत्पादों को स्थायी समाधान के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो न केवल भ्रामक है, बल्कि 1954 के ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम (डीएमआर एक्ट) का उल्लंघन भी है. हालांकि, इस कानून में कई खामियों के कारण यह प्रभावी नहीं रहा, जिसका फायदा उठाकर कई कंपनियों ने लोगों को ठगा. नतीजतन, न केवल लोगों का पैसा बर्बाद हुआ, बल्कि कई लोगों को नकली दवाओं के दुष्परिणाम भी झेलने पड़े.
आयुष सुरक्षा पोर्टल के लॉन्च के साथ मंत्रालय ने एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड तैयार किया है, जो वास्तविक समय में शिकायतों की निगरानी, त्वरित नियामक कार्रवाई, और डेटा विश्लेषण को संभव बनाता है. इस पोर्टल के जरिये आम नागरिक, स्वास्थ्य पेशेवर, और नियामक प्राधिकरण भ्रामक विज्ञापनों या दवा प्रतिक्रियाओं की शिकायत आसानी से दर्ज कर सकते हैं. पोर्टल सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन सिद्ध (सीसीआरएस) के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है और यह राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम के साथ जुड़ा हुआ है.
पोर्टल की खासियत यह है कि यह नागरिकों को अपनी शिकायतों पर की गई कार्रवाई की पारदर्शी जानकारी प्रदान करता है. यह पोर्टल राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों, राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस केंद्रों, और अन्य नियामक हितधारकों के डेटा को एकीकृत कर प्रभावी निगरानी और समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देता है.
आयुष मंत्रालय का यह कदम न केवल आयुष प्रणालियों की विश्वसनीयता को बनाये रखने में मदद करेगा, बल्कि नागरिकों और पेशेवरों को सुरक्षित और विश्वसनीय उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करने में भी सक्रिय भागीदार बनायेगा.