असीम मुनीर का तेहरान दौरा और पाकिस्तान का संकट
इस्लामाबाद । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भारी तनाव और युद्ध के हालात को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख 'फील्ड मार्शल' असीम मुनीर अब एक बड़े कूटनीतिक मिशन पर तेहरान पहुंचे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष संदेश के साथ तेहरान पहुंचे मुनीर की इस भूमिका ने भले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस्लामाबाद की कूटनीतिक अहमियत को अचानक बढ़ा दिया हो, लेकिन पाकिस्तान का आंतरिक माहौल इस समय बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चितता से भरा हुआ है.
रावलपिंडी में सेना की अतिरिक्त तैनाती और अनुच्छेद 245 लागू
एक तरफ जहां असीम मुनीर वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के भीतर राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर परिस्थितियां तेजी से बिगड़ रही हैं. देश में मची इस अंदरूनी उथल-पुथल का सबसे बड़ा प्रमाण 21 अगस्त को देखने को मिला, जब सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 245 का सहारा लेते हुए रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना की तीन कंपनियों को अगले छह महीने के लिए तैनात करने का अचानक आदेश जारी कर दिया.
रावलपिंडी सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना का जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) है. किसी अप्रिय घटना या संवेदनशील सुरक्षा स्थिति का हवाला देकर सेना के मुख्यालय वाले शहर में ही छह महीने के लिए अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किए जाने के इस फैसले ने देश के राजनीतिक और रक्षा हलकों में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इमरान खान का राजनीतिक आंदोलन और अदियाला जेल विवाद
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) अपनी रिहाई की मांग को लेकर अगले महीने एक बार फिर इस्लामाबाद और रावलपिंडी में एक बड़े विरोध मार्च की तैयारी कर रही है. अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान आज भी देश के सबसे लोकप्रिय और सैन्य प्रतिष्ठान के लिए सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी बने हुए हैं.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को इस्लामाबाद के एक शीर्ष निजी अस्पताल में भर्ती कराने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने के आदेश दिए थे. हालांकि, सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें एक सरकारी अस्पताल ले जाकर वापस रावलपिंडी की अदियाला जेल भेज दिया. सरकार के इस कदम से इमरान खान के समर्थक बेहद गुस्से में हैं और वे अदालत के आदेश की अवहेलना का आरोप लगा रहे हैं.
सैन्य प्रतिष्ठान में अंदरूनी खिंचाव और नए प्रांतों का विवाद
राजनीतिक संकट के बीच देश की थल, नभ और जल सेना तीनों के कमान प्रमुख के रूप में अपनी शक्तियां बढ़ाने वाले असीम मुनीर के पदोन्नति चक्र से सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर भी अंदरूनी खींचतान की खबरें हैं. इसके साथ ही, देश को अधिक प्रशासनिक इकाइयों में बांटने यानी नए प्रांत बनाने के नए प्रस्ताव पर भी विवाद छिड़ गया है.
पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी सहित कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्रयोग 1950 के दशक के 'वन यूनिट' प्रयोग जैसी ऐतिहासिक भूल साबित हो सकता है, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन और बांग्लादेश के निर्माण की नींव रखी थी.
पाकिस्तान का आर्थिक संकट और अनिश्चित भविष्य
इन सभी राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के पीछे पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था भी एक बड़ी वजह है. देश भले ही 2023 के डिफ़ॉल्ट संकट से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज और सऊदी अरब की मदद से अस्थायी रूप से बाहर आ गया हो, लेकिन आर्थिक स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है.
स्टेट बैंक की 11.5 प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर, 9.5 प्रतिशत की तेजी से बढ़ती महंगाई, और निर्यात के मुकाबले दोगुने से अधिक आयात ने आम जनता की कमर तोड़ दी है. कुल मिलाकर, बाहरी मंच पर शांतिदूत की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान खुद अंदरूनी तौर पर एक बेहद गंभीर राजनीतिक और आर्थिक चक्रव्यूह में फंसा हुआ नजर आ रहा है.