हिमाचल में इजराइली सैनिक की गिरफ्तारी की मांग- HRF
नई दिल्ली । डेस्क: बेल्जियम स्थित एक मानवाधिकार संगठन 'हिंद रजब फाउंडेशन' (HRF) ने भारत सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से हिमाचल प्रदेश में छुट्टियां मना रहे एक इजराइली रिजर्व सैनिक को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है. एनजीओ का आरोप है कि उक्त सैनिक गाजा में युद्ध अपराधों और रिहायशी इलाकों को तबाह करने की गतिविधियों में शामिल रहा है.
मिली जानकारी के अनुसार, एनजीओ ने इस संबंध में भारतीय पुलिस सेवा (IPS), विदेश मंत्रालय और आव्रजन ब्यूरो (Bureau of Immigration) के पास एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में इजराइली नागरिक ईतान गिल्बोआ को गिरफ्तार करने की मांग की गई है, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में छुट्टियां मना रहा है.
हिंद रजब फाउंडेशन का दावा है कि उन्होंने भारत सरकार को एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट में जियो-लोकेटेड वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और सैन्य दस्तावेजों के हवाले से आरोप लगाया गया है कि गिल्बोआ ने गाजा के खान यूनिस और रफाह इलाकों में पूरे के पूरे रिहायशी ब्लॉकों को नष्ट करने की कार्रवाई का नेतृत्व किया और उसका जश्न मनाया.
एनजीओ के मुताबिक, यह कृत्य जेनेवा कन्वेंशन एक्ट 1960 के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.
फाउंडेशन के महानिदेशक दियाब अबू जहजाह ने एक बयान जारी कर कहा कि ईतान गिल्बोआ कोई आम पर्यटक नहीं है, बल्कि एक युद्ध अपराधी है जो अपने कृत्य के परिणामों से बचने के लिए भारत में छिपा हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी धरती का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में नहीं होने देना चाहिए.
संगठन ने अपनी शिकायत में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(सी) और जेनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 146 का हवाला देते हुए कहा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और युद्ध अपराधों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है.
इस पूरे मामले पर फिलहाल पर्यटन नगरी मनाली में मौजूद इजराइली नागरिक या भारतीय अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
हिन्द रजब फाउंडेशन क्या है?
हिन्द रजब फाउंडेशन (Hind Rajab Foundation - HRF) बेल्जियम के ब्रुसेल्स में स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 24 सितंबर 2024 को हुई थी. यह 'मार्च 30 मूवमेंट' की कानूनी शाखा के रूप में काम करता है. इस फाउंडेशन की स्थापना मुख्य रूप से गाजा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ हुए कथित युद्ध अपराधों, मानवाधिकारों के उल्लंघन और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए इजरायली सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराने के उद्देश्य से की गई है.
इस संगठन का नाम गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई के दौरान मारी गई 5 वर्षीय फिलिस्तीनी बच्ची 'हिन्द रजब' की याद में रखा गया है. इसके संस्थापकों में बेल्जियम-लेबनानी राजनीतिक कार्यकर्ता व लेखक दियाब अबू जाहजाह और करीम हसून शामिल हैं.
यह फाउंडेशन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर अदालतों में कानूनी मामले (ऑफेंसिव लिटिगेशन) दायर करने का काम करता है. एचआरएफ का मुख्य ध्यान उन इजरायली सैनिकों और कमांडरों की पहचान करना है जो युद्ध क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं और जिन्होंने खुद ही सोशल मीडिया पर असैन्य संपत्तियों को नष्ट करने या अन्य गतिविधियों के वीडियो पोस्ट किए हैं.
संगठन इन डिजिटल साक्ष्यों, भू-स्थानिक (जियोलोकेटेड) वीडियो और चेन-ऑफ-कमांड के दस्तावेजों को इकट्ठा करके कानूनी फाइलें तैयार करता है. अब तक इस संगठन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में लगभग 1,000 इजरायली सैनिकों के नाम सौंपे हैं और दुनिया के लगभग 30 अलग-अलग देशों के अधिकार क्षेत्रों में 90 से अधिक आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं.
ब्राजील, अर्जेंटीना, जर्मनी, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में इस संगठन द्वारा कानूनी कार्रवाइयां शुरू की गई हैं.