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शिमला-दिल्ली पुलिस के बीच 24 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा खत्म

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26 फ़र. 2026, 04:17 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

शिमला पुलिस-दिल्ली पुलिस
शिमला पुलिस-दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली । डेस्क: राजधानी दिल्ली और हिमाचल प्रदेश की पुलिस के बीच पिछले 24 घंटों से जारी अभूतपूर्व गतिरोध गुरुवार की सुबह नाटकीय अंदाज में समाप्त हो गया. दिल्ली पुलिस की टीम आखिरकार एआई (AI) समिट के दौरान हुए "शर्टलेस विरोध प्रदर्शन" के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हो गई. 


इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दोनों राज्यों की पुलिस के बीच भारी तनाव देखा गया, जहां दिल्ली पुलिस की टीम को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बावजूद करीब पांच घंटे तक "हिरासत" में रखा गया. यह विवाद बुधवार सुबह उस समय शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस की एक टीम ने शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव इलाके के एक होटल से युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं सौरभ, सिद्धार्थ और अरबाज को गिरफ्तार किया. इन पर 20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और दंगों से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज था.


हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस कार्रवाई को "अवैध" करार देते हुए दिल्ली पुलिस के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया. शिमला पुलिस का तर्क था कि दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना यह ऑपरेशन चलाया और रिसॉर्ट से सीसीटीवी फुटेज भी बिना किसी आधिकारिक रसीद के जब्त कर लिए. 


इसके बाद बुधवार शाम को जब दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर दिल्ली जा रही थी, तो शिमला पुलिस ने शोघी बॉर्डर पर उनके वाहनों को रोक लिया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दिल्ली पुलिस के जवानों और आरोपियों को बुधवार देर रात दीनदयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद रात करीब 1:30 बजे एसीजेएम-II एकांश कपिल के आवास पर पेश करना पड़ा. 


वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद टीम आगे बढ़ी, लेकिन गुरुवार तड़के कनलोग में उन्हें फिर से रोक लिया गया. शिमला पुलिस ने निर्देश दिया कि केवल कुछ कर्मी ही आरोपियों को लेकर दिल्ली जाएं, जबकि बाकी टीम अपहरण के मामले की जांच में सहयोग के लिए वहीं रुके. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोपियों की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है और वे अपने किसी भी साथी को पीछे छोड़कर नहीं जाएंगे.


विवाद का एक मुख्य केंद्र वह वाहन बना जिसमें डिजिटल साक्ष्य, हथियार और सीसीटीवी फुटेज रखे थे. शोघी बॉर्डर पर शिमला पुलिस ने इस वाहन को बैरिकेड कर दिया और उसकी चाबियां मांगी, जिसे दिल्ली पुलिस ने देने से इनकार कर दिया. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने तर्क दिया कि उन्होंने अदालत को सभी दस्तावेज और जब्ती मेमो दिखाए हैं, जिसके आधार पर उन्हें 18 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली है. 


इस गतिरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के वीडियो भी सामने आए, जिसमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी यह कहते सुने गए कि उन्हें आरोपियों को 24 घंटे के भीतर दिल्ली की अदालत में पेश करना है, जबकि शिमला पुलिस का दावा था कि दिल्ली पुलिस जांच में बाधा डाल रही है और उन्होंने गिरफ्तारी के समय कोई एफआईआर नंबर या कानूनी दस्तावेज नहीं दिखाए थे.


इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर "अराजकता की राजनीति" करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हिमाचल पुलिस को दिल्ली पुलिस का सहयोग करना चाहिए था, न कि उन्हें हिरासत में लेना. ठाकुर ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करने वाले तत्वों को संरक्षण देने वाला कदम बताया. 


दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में की गई छापेमारी को दुर्भाग्यपूर्ण और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है. 


आरोपियों के वकील संदीप दत्ता ने इस पूरी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए कहा कि उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है, जबकि दिल्ली पुलिस के वकील नंद लाल ने कहा कि ट्रांजिट रिमांड कानूनी रूप से प्राप्त की गई है. 


दिल्ली पुलिस अब तक इस मामले में भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब सहित 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. गुरुवार सुबह जब यह गतिरोध खत्म हुआ, तब कहीं जाकर दिल्ली पुलिस की टीम सुरक्षित सीमा पार कर सकी, जिससे पिछले 24 घंटों से शोघी और शिमला के आसपास फंसे आम यात्रियों को भी राहत मिली.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP