सोम, 19 अक्टू. 2026

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पशुपतिनाथ से बैद्यनाथ धाम तक बनेगा कॉरिडोर, अब 14 की जगह लगेंगे 3 घंटे

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17 फ़र. 2026, 10:41 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

पशुपतिनाथ मंदिर
पशुपतिनाथ मंदिर

काठमांडू । डेस्क: बिहार सरकार ने नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर को झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम से जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी 'पशुपतिनाथ-बैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर' का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है. विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए सड़क निर्माण मंत्री जयसवाल ने बताया कि यह 250 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. 


प्रस्तावित कॉरिडोर काठमांडू से शुरू होकर भीम नगर और बीरपुर के रास्ते बिहार के सुपौल जिले से भारत में प्रवेश करेगा. इसके बाद यह बिहार के मधेपुरा, सहरसा, खगाड़िया, मुंगेर और बांका जिलों से गुजरते हुए सीधे देवघर पहुंचेगा.

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इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यात्रा समय में होने वाली भारी कमी है. वर्तमान में इन दो ज्योतिर्लिंगों के बीच की दूरी 500 किलोमीटर से अधिक है, जिसे तय करने में लगभग 13 से 14 घंटे लगते हैं. 


इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह दूरी घटकर आधी रह जाएगी और श्रद्धालु मात्र दो से तीन घंटे में सफर पूरा कर सकेंगे. इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पुराने मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा. इसके अतिरिक्त, श्रावण मास में सुल्तानगंज से देवघर पैदल जाने वाले कांवड़ियों के लिए एक अलग सर्विस रोड का भी प्रस्ताव दिया गया है.


यह कॉरिडोर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पूर्वी भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की भी क्षमता रखता है. 


यह एक्सप्रेसवे रक्सौल-हल्दिया और दरभंगा-अमस जैसे अन्य बड़े राजमार्गों से जुड़ेगा, जिससे बिहार और झारखंड के पिछड़े जिलों में व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. 


मंत्री ने सदन को सूचित किया कि भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना के तहत बिहार में पहले से ही 554 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है. यदि केंद्र से इस परियोजना को जल्द मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य सरकार का लक्ष्य इसे अगले पांच वर्षों के भीतर पूरा करने का है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP