73 वर्षीय महिला को 33 साल बाद US से निर्वासित किया गया
मोहाली । डेस्क: 73 वर्षीय हरजीत कौर, जो 1992 में अमेरिका पहुंची थीं, को हाल ही में निर्वासित कर भारत भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि कोई भी उस पीड़ा से नहीं गुजरना चाहिए, जो उन्हें सहनी पड़ी. अब वह अपने परिवार से अमेरिका में फिर से मिलने की इच्छा रखती हैं.
हरजीत कौर, जो तरण तारण जिले के पंगोटा गांव की रहने वाली हैं, ने मोहाली में अपनी बहन के घर पर पत्रकारों से बातचीत में बताया, "मैं हर छह महीने में सैन फ्रांसिस्को में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जाती थी. 8 सितंबर को जब मैं वहां गई, तो उन्होंने मुझे बिना कुछ बताए हिरासत में ले लिया."
उनकी बहू मंजी के अनुसार, हरजीत कौर 2012 में असफल रही अपनी शरण याचिका के बाद भी नियमित रूप से ICE कार्यालय में उपस्थित होती थीं.
हरजीत कौर ने बताया कि उन्हें अपने परिवार से मिलने या अलविदा कहने का मौका तक नहीं दिया गया. "मेरे परिवार ने मुझे भारत लाने की अनुमति मांगी और फ्लाइट टिकट भी दिखाया, लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया,"
उन्होंने कहा. उन्होंने यह भी बताया कि हिरासत में उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया गया. "मुझे सैन फ्रांसिस्को से बेकर्सफील्ड ले जाते समय हथकड़ी और बेड़ियां पहनाई गईं. मुझे ठंडे कमरे में रातभर रखा गया, जहां मैं लेट भी नहीं सकी," हरजीत कौर ने आंसुओं के साथ कहा.
उन्होंने कहा, "मेरे पास वर्क परमिट, आईडी और लाइसेंस सब कुछ था." हरजीत कौर ने यह भी बताया कि वह शाकाहारी हैं, लेकिन उन्हें दी गई भोजन में बीफ था, जिसे वह नहीं खा सकीं. उनकी दवाइयों की मांग को भी अनसुना कर दिया गया.
हरजीत कौर को 132 अन्य निर्वासित लोगों के साथ, जिनमें 15 कोलंबियाई नागरिक शामिल थे, एक विमान से भारत भेजा गया. उन्होंने बताया, "विमान में दो अच्छे अधिकारी थे जिन्होंने मुझे हथकड़ी नहीं पहनाई, हालांकि बाकी लोगों को बेड़ियां डाली गई थीं."
1992 में अपने दो बेटों के साथ अमेरिका पहुंचीं हरजीत कौर ने कहा, "मेरा पूरा परिवार - मेरे बच्चे, पोते-पोतियां - अमेरिका में बसे हैं. उनकी आवाज सुनकर मैं एक शब्द भी नहीं बोल पाती. मैंने उनकी देखभाल की थी."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अमेरिका लौटना चाहेंगी, तो उन्होंने तुरंत कहा, "निश्चित रूप से. मेरा पूरा परिवार वहां है."
हरजीत कौर ने हाल के महीनों में भारतीयों के बड़े पैमाने पर निर्वासन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जिम्मेदार ठहराया.
"मैं 1992 से अमेरिका में थी, लेकिन पहले कभी ऐसी कार्रवाई नहीं देखी. किसी को भी वापस जाने के लिए नहीं कहा गया," उन्होंने कहा.
उनकी हिरासत के बाद कैलिफोर्निया में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने "हैंड्स ऑफ अवर ग्रैंडमा" और "ब्रिंग ग्रैंडमा होम" जैसे नारे लिखे तख्तियां लेकर उनकी रिहाई की मांग की थी.