खाड़ी संकट में फंसे 18 हजार भारतीय नाविक
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच लगभग 18,000 भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर 'आज रात बहुत भीषण हमला' करने की चेतावनी के बाद इस पूरे क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं. इस तनाव के बीच, अमेरिकी नौसेना द्वारा तेल टैंकरों पर की गई बमबारी में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जिस पर भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास के प्रभारी (चार्ज डी'अफेयर्स) को तलब कर बेहद कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कुल नाविकों में से 562 चालक दल के सदस्य इस समय 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर सवार हैं. इनमें से 329 नाविक होर्मुज जलडमरू-मध्य के पश्चिम में और 233 ओमान की खाड़ी में मौजूद जहाजों पर तैनात हैं.
यह चिंता तब और गंभीर हो गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिकी सेना जल्द ही वेनेजुएला की तर्ज पर ईरान के 'खार्ग द्वीप' और अन्य तेल व गैस बुनियादी ढांचों को अपने नियंत्रण में ले लेगी. अमेरिकी सेना वर्तमान में ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी कर रही है.
इस बीच, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की कि ओमान के तट के पास पलाऊ-ध्वज वाले तेल टैंकर 'एमटी सेटबेलो' (MT Settebello) पर अमेरिकी सैन्य हमले के बाद लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई है.
मृतकों की पहचान आंध्र प्रदेश के मुख्य अभियंता सुरेश पटनाला और हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा के रूप में हुई है, जबकि तीसरे नाविक की पहचान की जा रही है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने स्वीकार किया है कि उनके विमानों ने ईरानी तेल ले जा रहे इस जहाज पर "सटीक हथियारों" से हमला किया था.
भारत ने अमेरिका के इस कदम पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोपरि है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि बातचीत और कूटनीति ही इस संघर्ष का एकमात्र समाधान हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत होर्मुज जलडमरू-मध्य से जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए.
राहत की बात यह है कि 'एमटी सेटबेलो' से 21 भारतीयों सहित कुल 25 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. वहीं, 'जलवीर' नामक एक अन्य जहाज से भी नाविकों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू कर दिया गया है.
सरकार ने मृतक नाविकों के परिवारों को 'सीमेन वेलफेयर फंड सोसाइटी' की ओर से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिन तीन जहाजों पर हमले हुए हैं, वे विदेशी (पलाऊ और गिनी) ध्वज वाले थे, कोई भी जहाज भारतीय स्वामित्व का नहीं था.