SC पर टिकी ट्रंप प्रशासन की नजर, शुल्क वापसी से अर्थव्यवस्था को खतरा
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके प्रशासन के खिलाफ जाता है, तो विभिन्न देशों से वसूले गए शुल्क का आधा हिस्सा वापस करना पड़ सकता है. इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है.
बेसेंट ने एनबीसी न्यूज के एक कार्यक्रम में कहा, "अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे खिलाफ गया, तो हमें शुल्क का आधा पैसा वापस करना होगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए बहुत नुकसानदेह होगा. लेकिन अगर कोर्ट ऐसा कहता है, तो हमें करना पड़ेगा."
हाल ही में न्यूयॉर्क की एक निचली अदालत ने ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्क को अवैध करार दिया था.
हालांकि, अदालत ने 14 अक्टूबर तक इन शुल्कों को लागू रखने की अनुमति दी है, ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके. ट्रंप ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
बेसेंट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ गया तो प्रशासन क्या कदम उठाएगा.
हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि शुल्क लगाने के लिए अन्य कई वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं. फिर भी, उन्होंने माना कि वर्तमान में ट्रंप जिस तरह व्यापारिक साझेदार देशों पर शुल्क के जरिए दबाव बना रहे हैं, वैसी स्थिति भविष्य में नहीं रहेगी. बेसेंट ने कहा कि अन्य उपायों में समझौते की गुंजाइश कम होगी.
इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने सीबीएस न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, तो अन्य कानूनी प्राधिकरण शुल्क लगाने का काम कर सकते हैं, जिनके जरिए ट्रंप अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.
ट्रंप ने विभिन्न देशों पर शुल्क लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम का सहारा लिया था.
उनका दावा था कि व्यापारिक असंतुलन के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई है, जिसके समाधान के लिए शुल्क जरूरी हैं. हालांकि, निचली अदालत ने इस कदम को गैरकानूनी ठहराया है.
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो ट्रंप की व्यापार नीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के भविष्य को निर्धारित करेगा.