ट्रंप ने EU से भारत पर 100% टैरिफ की मांग की, फिर मोदी को 'अच्छा दोस्त' बताया
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साथ दो विरोधाभासी कदम उठाए हैं. एक ओर, उन्होंने यूरोपीय संघ से भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का आग्रह किया ताकि रूस से कच्चे तेल की खरीद को रोका जा सके. दूसरी ओर, उन्होंने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं की प्रशंसा करते हुए एक उत्साहपूर्ण संदेश पोस्ट किया.
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा, "मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आने वाले हफ्तों में बात करने के लिए उत्सुक हूं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं चल रही हैं और इनका "सफल निष्कर्ष" होगा.
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने वाशिंगटन में अमेरिकी और यूरोपीय राजनयिकों की एक बैठक में फोन के जरिए हिस्सा लिया, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक परिणामों को मॉस्को के लिए और कठिन करने पर चर्चा हुई.
एक यूरोपीय राजनयिक ने ट्रंप के हवाले से कहा, "हम तैयार हैं, अभी तैयार हैं, लेकिन हम तभी आगे बढ़ेंगे जब हमारे यूरोपीय साझेदार हमारे साथ कदम मिलाएंगे."
रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि वाशिंगटन ईयू के नेतृत्व का अनुसरण करेगा और भारत व चीन पर ईयू द्वारा लगाए गए किसी भी टैरिफ को "प्रतिबिंबित" करने के लिए तैयार है. ट्रंप का यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की उनकी असफल कोशिशों से उत्पन्न निराशा का परिणाम माना जा रहा है.
एक अमेरिकी व्यापार वार्ताकार ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि ट्रंप ने बैठक के दौरान फोन किया था.
उन्होंने कहा, "ट्रंप का मानना है कि सबसे स्पष्ट उपाय यह है कि हम सभी मिलकर भारी टैरिफ लगाएं और तब तक इन्हें बनाए रखें जब तक चीन तेल खरीदना बंद नहीं कर देता. रूसी तेल के लिए अन्य विकल्प बहुत सीमित हैं."
ट्रंप का भारत पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का प्रयास तब और चौंकाने वाला है, जब उन्होंने लगभग उसी समय भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के बारे में सकारात्मक टिप्पणी की.
उन्होंने कहा, "भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए वार्ताएं जारी रखे हुए हैं. मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द बात करने के लिए उत्सुक हूं."
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के इस बयान का गर्मजोशी से जवाब देते हुए एक्स पर लिखा, "भारत और अमेरिका करीबी दोस्त और स्वाभाविक साझेदार हैं. मुझे विश्वास है कि हमारी व्यापार वार्ताएं भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं को खोलने का मार्ग प्रशस्त करेंगी."
भारत और चीन मिलकर रूस के कच्चे तेल के निर्यात का बड़ा हिस्सा खरीदते हैं, जबकि तुर्की और बुल्गारिया जैसे देश छोटी मात्रा में खरीद करते हैं.
ट्रंप का मानना है कि दोनों एशियाई देशों पर एक साथ भारी टैरिफ लगाने से मॉस्को की तेल बिक्री रुक जाएगी और उसकी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा.
अमेरिका ने पहले ही रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, साथ ही व्यापार समझौता न होने के लिए एक और 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है.
अप्रैल में चीन पर भी भारी टैरिफ लगाए गए थे, लेकिन बाजार में उथल-पुथल के बाद इन्हें वापस ले लिया गया.
ट्रंप का यह नवीनतम कदम ऐसे समय में आया है जब ईयू रूसी तेल आयात को कम करने के लिए भारत और चीन पर "माध्यमिक प्रतिबंध" लगाने पर विचार कर रहा है.
हालांकि, कई यूरोपीय सरकारें इस तरह के कठोर कदमों को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि इससे उनके अपने व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है. (फोटो- प्रतीकात्मक)