अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, सैन्य ठिकानों पर हमले
नई दिल्ली । डेस्क: वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव तेज हो गया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने गुरुवार को दावा किया कि उसने एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है. यह कार्रवाई अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी ड्रोन ऑपरेशनों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है. एक अनाम अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के चार हमलावर ड्रोनों को मार गिराया और बंदर अब्बास बंदरगाह शहर में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को नष्ट कर दिया.
अमेरिकी अधिकारी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से रक्षात्मक और संघर्षविराम बनाए रखने के लिए जरूरी बताया, जबकि ईरानी मीडिया के अनुसार, IRGC ने उस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया जहां से यह हमला शुरू किया गया था. इस ताजा सैन्य गतिविधि के कारण इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पिछले दो महीनों से लागू आंशिक संघर्षविराम खतरे में पड़ता दिख रहा है.
इस सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है. बुधवार को करीब 5 प्रतिशत की गिरावट के बाद, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी देखी गई. अमेरिकी क्रूड वायदा में 3 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया, जबकि शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ.
यह युद्ध इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुआ था, जिसने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डाल दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का व्यापार होता है, जो इस समय दोनों देशों के बीच विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है.
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते के मसौदे को सिरे से खारिज कर दिया है.
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने दावा किया था कि एक अनौपचारिक समझौते के तहत वाणिज्यिक शिपिंग को युद्ध-पूर्व स्तर पर लाने और ईरान-ओमान द्वारा संयुक्त रूप से जलमार्ग का प्रबंधन करने पर सहमति बन रही है. इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर किसी भी एक देश का नियंत्रण नहीं होगा.
ट्रंप ने सख्त लहजे में ओमान को भी चेतावनी दी कि उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना होगा. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अभी इस समझौते से संतुष्ट नहीं है और ईरान पर से प्रतिबंध हटाने का कोई विचार नहीं है.
दूसरी तरफ, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने ट्रंप के बयानों को 'अवरोध से निकलने की छटपटाहट' बताया और कहा कि ईरान यूरेनियम संवर्धन और प्रतिबंध हटाने की अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दृढ़ता से दोहराया है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा.