SC ने बिहार SIR के लिए आधार को 12वां पहचान पत्र घोषित किया
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि बिहार में होने वाले विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में पहचान स्थापित करने के लिए आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाए. वर्तमान में, बिहार एसआईआर के लिए मतदाताओं को अपने नामांकन फॉर्म के साथ 11 निर्धारित दस्तावेज जमा करने होते हैं.
जस्टिस सूर्य कांत और जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा, और आयोग मतदाता सूची में शामिल करने के लिए प्रस्तुत आधार कार्ड नंबर की प्रामाणिकता की जांच कर सकता है. खंडपीठ ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि केवल वास्तविक नागरिकों को ही मतदान करने की अनुमति दी जाए और जाली दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक होने का दावा करने वालों को मतदाता सूची से बाहर रखा जाए.
कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह उसी दिन आधार कार्ड को पहचान के दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से उन शो-कॉज नोटिसों पर स्पष्टीकरण मांगा, जो उसने मतदाताओं से आधार कार्ड स्वीकार न करने वाले मतदान अधिकारियों को जारी किए थे.
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने तर्क दिया कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.6 प्रतिशत ने दस्तावेज जमा किए हैं, और आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने की याचिका का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं है. हालांकि, खंडपीठ ने आधार एक्ट 2016 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, लेकिन इसे पहचान के प्रमाण के रूप में माना जा सकता है.
1 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राजनीतिक दलों द्वारा समय सीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग ने सूचित किया था कि बिहार में तैयार मसौदा मतदाता सूची में दावे, आपत्तियां और सुधार 1 सितंबर के बाद भी दाखिल किए जा सकते हैं, लेकिन इन पर विचार अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद किया जाएगा. आयोग ने बताया कि दावे और आपत्तियां प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख तक दर्ज की जा सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर को लेकर भ्रम को "मुख्य रूप से विश्वास का मुद्दा" करार देते हुए, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह व्यक्तिगत मतदाताओं और राजनीतिक दलों को मसौदा सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज करने में सहायता के लिए पैरालीगल स्वयंसेवकों को तैनात करे. मसौदा मतदाता सूची 1 अगस्त को प्रकाशित की गई थी.
चुनाव आयोग ने 1 सितंबर की समय सीमा बढ़ाने का विरोध किया था और बताया कि 22 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, 30 अगस्त तक केवल 22,723 दावे शामिल करने के लिए और 1,34,738 आपत्तियां हटाने के लिए दर्ज की गई थीं. बिहार एसआईआर के लिए 24 जून के कार्यक्रम के अनुसार, मसौदा सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा 1 सितंबर को समाप्त हो गई थी, और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी.