पाक ने सऊदी अरब को परमाणु छत्र की पेशकश की
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने घोषणा की है कि हाल ही में हस्ताक्षरित रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान अपनी परमाणु क्षमताओं को सऊदी अरब के लिए उपलब्ध करा सकता है. 17 सितंबर, 2025 को हुए इस समझौते में कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा, जिससे इस्लामाबाद और रियाद के बीच दशकों पुराने सैन्य संबंध और मजबूत होंगे.
18 सितंबर, 2025 को जियो टीवी को दिए साक्षात्कार में आसिफ ने पहली बार स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों को सऊदी अरब के साथ साझा कर सकता है.
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम इजरायल को एक रणनीतिक संदेश है, जिसे मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु-सशस्त्र देश माना जाता है. यह घोषणा इजरायल के हालिया हमले के बाद आई है, जिसमें कतर में हमास नेताओं को निशाना बनाया गया, जिसमें छह लोग मारे गए और गाजा में चल रहे इजरायल-हमास युद्ध के बीच खाड़ी अरब देशों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गईं.
आसिफ ने पाकिस्तान की मजबूत परमाणु क्षमताओं पर जोर दिया, जो भारत के अनुमानित 172 परमाणु हथियारों का मुकाबला करने के लिए विकसित की गई थीं, जबकि पाकिस्तान के पास लगभग 170 हथियार हैं, जैसा कि बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स में बताया गया है.
सऊदी अरब का पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में वित्तीय समर्थन का इतिहास रहा है, खासकर तब जब पाकिस्तान को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था.
रिटायर्ड पाकिस्तानी ब्रिगेडियर जनरल फेरोज हसन खान ने उल्लेख किया कि सऊदी फंडिंग महत्वपूर्ण थी.
इस समझौते से क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता और हालिया अमेरिकी प्रतिबंधों के संदर्भ में.