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कोलकाता HC: गर्भवती सोनाली बीबी मामला, बांग्लादेश पुशबैक आदेश रद्द

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27 सित. 2025, 01:11 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

गर्भवती सोनाली बीबी
गर्भवती सोनाली बीबी

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की आठ महीने की गर्भवती सोनाली बीबी और उनके परिवार को बांग्लादेश में 'पुशबैक' करने के मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जस्टिस तपोब्रत चक्रबर्ती और जस्टिस रितब्रत कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार के पुशबैक आदेश को रद्द करते हुए एक महीने के भीतर सोनाली समेत उनके परिवार के छह सदस्यों को भारत वापस लाने का निर्देश दिया. अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि 48 घंटों के भीतर बिना पर्याप्त जांच के यह कैसे तय किया गया कि वे बांग्लादेशी हैं.


पिछले साल जून में दिल्ली के रोहिणी इलाके में केएन काटजू मार्ग थाने की पुलिस ने सोनाली बीबी, उनके पति दानिश शेख, उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को बांग्लादेशी मानकर हिरासत में लिया था. 24 जून को गिरफ्तारी के बाद 26 जून को उन्हें असम सीमा के रास्ते बांग्लादेश भेज दिया गया. कोलकाता हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे. जस्टिस चक्रबर्ती ने कहा, "सोनाली को 24 जून को हिरासत में लिया गया और 48 घंटों के भीतर बांग्लादेश भेजने का फैसला लिया गया. यह निर्णय किस प्रक्रिया के तहत हुआ? कानून के अनुसार कम से कम 30 दिन तक हिरासत में रखकर जांच होनी चाहिए थी. इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?"

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अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सिर्फ बंगाली बस्ती से होने और बांग्ला भाषा बोलने के आधार पर उन्हें बांग्लादेशी माना गया. जस्टिस चक्रबर्ती ने टिप्पणी की, "गिरफ्तारी के आदेश में लिखा गया कि उन्हें बंगाली बस्ती से लाया गया. क्या सिर्फ इस आधार पर बांग्लादेशी करार दिया गया? इसके पीछे का कारण स्पष्ट करना होगा."


केंद्र और दिल्ली पुलिस का पक्ष


केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रबर्ती ने मामले की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यह घटना दिल्ली में हुई, इसलिए कोलकाता हाईकोर्ट को इसकी सुनवाई का अधिकार नहीं है. उन्होंने दावा किया, "मामला दिल्ली में हुआ. दिल्ली के संबंधित अधिकारियों को पक्ष बनाया गया है. दिल्ली में ही याचिका दायर होनी चाहिए थी. याचिकाकर्ताओं ने नागरिकता से संबंधित जानकारी छिपाई और उन्हें जुर्माना करना चाहिए. इसमें बंगाली विद्वेष का कोई सवाल नहीं है."


दिल्ली पुलिस के वकील धीरज त्रिवेदी ने कहा कि सोनाली और उनके परिवार ने कभी कोई हलफनामा देकर यह दावा नहीं किया कि वे बांग्लादेशी नहीं हैं. उन्होंने कहा, "पुलिस ने बंगाली बस्ती से गिरफ्तारी की और दस्तावेज न होने के कारण उन्हें बांग्लादेश भेजा गया." दिल्ली पुलिस के एक अन्य वकील अमरज्योति तिवारी ने सोनाली के जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड की जानकारी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "आधार कार्ड में सोनाली के पिता का नाम भदू शेख नहीं, बल्कि भोलू शेख लिखा है. उनके जन्म की तारीख 1 जनवरी 2000 है, जो संदिग्ध है."


याचिकाकर्ता का जवाब


याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील रघु चक्रबर्ती ने दलील दी कि सोनाली और उनका परिवार भारतीय है. उन्होंने कहा, "बीरभूम के पाईकर में सोनाली के पिता भदू शेख के पास खेती की जमीन और घर है. उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इन दस्तावेजों को नजरअंदाज किया. रघु ने कहा, "सोनाली और उनका परिवार अशिक्षित है. वे जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को नहीं समझते. उनके जन्म प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज पश्चिम बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला."


सुप्रीम कोर्ट का निर्देश


29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत और जयमाल्य बागची की बेंच ने कोलकाता हाईकोर्ट को इस मामले की हेबियस कॉर्पस याचिका पर जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोनाली और उनके परिवार को बांग्लादेश भेजने के आरोप की जांच होनी चाहिए. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की.


पृष्ठभूमि और आरोप


सोनाली बीबी और उनका परिवार दिल्ली के रोहिणी के सेक्टर 26 में लगभग दो दशकों से रह रहा था. वे कचरा बीनने और घरेलू काम करके गुजारा करते थे. जून 2024 में दिल्ली पुलिस ने उनके घर को घेर लिया और उन्हें बांग्लादेशी बताकर हिरासत में लिया. इसके बाद उन्हें बांग्लादेश के चापाईनवाबगंज जिले में भेज दिया गया, जहां बांग्लादेश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया. परिवार का आरोप है कि उन्हें बिना किसी ठोस सबूत के बांग्लादेश भेजा गया.


मामला पहले दिल्ली हाईकोर्ट में दायर हुआ था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया. पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड की मदद से परिवार ने कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने केंद्र को चार हफ्तों के भीतर सोनाली और उनके परिवार को वापस लाने का आदेश दिया. केंद्र ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.


(फोटो-प्रतीकात्मक)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP