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वेनेजुएला के बाद ट्रंप की कोशिश क्यूबा पर लगाम कसने की

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11 जन. 2026, 11:12 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

ट्रंप की नजर क्यूबा पर
ट्रंप की नजर क्यूबा पर

नई दिल्ली । डेस्क: वेनेजुएला पर कड़ा शिकंजा कसने के बाद अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को सीधे निशाने पर ले लिया है. ट्रंप ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि अब क्यूबा को न तो वेनेजुएला से तेल मिलेगा और न ही कोई आर्थिक मदद. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि क्यूबा को जल्द से जल्द वॉशिंगटन के साथ ‘डील’ कर लेनी चाहिए, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं.


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अब क्यूबा को न तेल मिलेगा, न पैसा-शून्य! मैं जोर देकर सलाह देता हूं कि बहुत देर होने से पहले वे समझौता कर लें.” उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा वर्षों तक वेनेजुएला से मिलने वाले तेल और पैसों पर निर्भर रहा है.

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इस बयान के पीछे बड़ा कारण वेनेजुएला है. अमेरिकी तेल नाकेबंदी और जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी कार्रवाई के बाद से वेनेजुएला से क्यूबा के लिए तेल की कोई खेप रवाना नहीं हुई है. शिपिंग डेटा के मुताबिक, वेनेजुएला अब भी क्यूबा का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है और पिछले साल करीब 26,500 बैरल प्रतिदिन तेल भेजा गया था, जो क्यूबा की तेल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत था.


ट्रंप के तीखे रुख पर क्यूबा ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने कहा कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है और कोई उसे निर्देश नहीं दे सकता. उन्होंने अमेरिका पर 66 वर्षों से क्यूबा को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए तैयार है.


क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने भी अमेरिका को “बेकाबू आपराधिक महाशक्ति” बताते हुए कहा कि क्यूबा को किसी भी देश से ईंधन आयात करने का पूरा अधिकार है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि लगातार बिजली कटौती, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव के बीच क्यूबा के लिए वैकल्पिक तेल स्रोत खोजना आसान नहीं होगा.


इस बीच मेक्सिको क्यूबा के लिए एक सीमित विकल्प बनकर उभरा है. मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाउम ने कहा है कि उनके देश ने आपूर्ति नहीं बढ़ाई है, लेकिन वेनेजुएला में बदले हालात के कारण मेक्सिको क्यूबा के लिए एक “महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता” बन गया है.


अमेरिका के भीतर भी ट्रंप की विदेश नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आम अमेरिकी मतदाता महंगाई, स्वास्थ्य बीमा और आवास जैसे घरेलू मुद्दों पर ध्यान चाहते हैं. 


इसके बावजूद ट्रंप का रुख बताता है कि वे वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा पर दबाव बढ़ाकर लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव को और मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP