किसानों के कुओं पर प्रशासन का कब्जा

Thursday, February 4, 2016

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कुआं

भोपाल | समाचार डेस्क: मंदसौर में प्रशासन ने लोगों की प्यास बुझाने के लिये किसानों के कुओं पर कब्जाकर लिया है. इससे किसानों के सामने आजीविका का सवाल खड़ा हो गया है. मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के किसान नारायण टांक के खेत में कुआं है, इस कुएं में पानी भी है, मगर खेत में बोई गई लहसुन और गेहूं की फसल पानी की कमी के चलते सूखने की कगार पर पहुंच गई है, ऐसा इसलिए क्योंकि उनके कुएं पर नगरपालिका ने कब्जा कर लिया है. नारायण अकेले ऐसे किसान नहीं बल्कि उन जैसे 50 किसान और हैं, जो पानी के लिए तरस रहे है. वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन ने किसानों को उनका हक दिलाने का वादा किया है.

मंदसौर जिले में है नरसिंहपुरा क्षेत्र. इस जिले के नगरपालिका क्षेत्र में पानी का संकट है और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नगरपालिका ने नरसिंहपुरा क्षेत्र के किसानों के खेत में बने कुओं पर कब्जा कर लिया है. किसानों की मोटर और बिजली के कनेक्शन को हटा दिया गया है. अब नगरपालिका किसानों के कुएं से पानी को अपने कुओं में स्थानांतरित कर रही है. जहां से नगर में जलापूर्ति की जाती है.

किसानों का एक दल बुधवार को भोपाल पहुंचा और उसने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैस से मुलाकात कर उनको अपनी स्थिति से अवगत कराया. नारायण टांक ने कहा कि उनके पास आठ बीघा जमीन है, जिसमें लहसुन, गेहूं आदि फसलें बोई हैं, मगर पानी की समस्या के चलते यह फसल चौपट होने की कगार पर है. वे बताते हैं कि उनके कुएं में पानी है, मगर उस पानी से फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं.

इसी तरह गोपाल टांक को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है, उनका कहना है कि साढ़े तीन बीघा में फसल बोई है, सब चौपट हो जाएगी अगर पानी नहीं मिला. वे मुख्यमंत्री की खेती को फायदे का धंधा बनाने के वादों पर सवाल उठाते हैं, उनका कहना है कि उन्हें अपने ही कुएं से पानी नहीं मिल पा रहा तो अन्य क्षेत्रों के किसानों का क्या हाल होगा, उसका अंदाजा उन्हें सहज हो रहा है.

किसानों के साथ आए राजकुमार कुमावत ने कहा कि किसान एक तरफ फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरी ओर जानवरों के लिए पानी का संकट खड़ा हो रहा है. जिन किसानों के कुओं पर कब्जा किया गया है, उनसे जुड़े लगभग 800 लोगों की आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. किसानों को अगर पानी नहीं मिला तो फसल की बबार्दी तय है.

किसानों ने बताया कि मंदसौर में पेयजल आपूर्ति के रामघाट, मिर्जापुरा, कालाबाड़ा बांध और शिवना नदी से होती है, उसके बाद भी नगरपालिका ने पेयजलापूर्ति के नाम पर उनके कुओं पर कब्जा कर लिया है. वहीं इसी क्षेत्र में भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता के भाई और अन्य प्रभावशाली लोगों के कुओं से खेतों में सिंचाई चालू है.

यहां बताना लाजिमी होगा कि मंदसौर की जमीन बेहद उपजाऊ है, यहां लहसुन, प्याज, सरसों, गेहूं, चना, करंजी आदि की अच्छी पैदावार होती है. एक बीघा लगभग आधा एकड़ में लहसुन 25 क्विंटल और गेहूं 30 क्विंटल से ज्यादा पैदा होता है. यहां का किसान सक्षम और प्रगतिशील है.

जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने कहा है कि किसानों के कुओं से पेयजल आपूर्ति के लिए पानी लिया जा रहा है, अगर किसानों की फसल पर असर पड़ रहा है तो उनकी जब्त की गई मोटर वापस कराई जाएंगी और उन्हें उनका हक दिलाया जाएगा. प्रशासन आवश्यक होने पर पानी का परिवहन कर शहर वासियों की पेयजल की जरूरत को पूरा करेगा.

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