चुनाव में बेबस बस ड्राइवर

Wednesday, November 6, 2013

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स्कूल बस

रायपुर| संवाददाताः छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिये बस्तर गई सैकड़ों बसों और उनके ड्राइवर-कंडक्टर का अता-पता नहीं है. सुरक्षा बलों को नक्सल प्रभावित बस्तर के अलग-अलग इलाकों में लेकर गये 1100 से अधिक बसों में से अधिकांश बसें 20 दिन के बाद भी वापस नहीं लौटी हैं.

बसों के मालिक अपने ड्राइवर और कंडक्टर से संपर्क नहीं हो पाने के कारण परेशान हैं.

नक्सल इलाके में गये ड्राइवर और कंडक्टरों के परिजन तो हर रोज़ उनके सुरक्षित होने की कामना करते हुये उनकी प्रतीक्षा रहे हैं.

राज्य के पुलिस महानिदेशक ने बसों को सुरक्षाबलों को नियत स्थान पर पहुंचाने के तुरंत बाद वापसी के निर्देश दिये थे.

लेकिन राज्य के परिवहन विभाग का कहना है कि बसों की वापसी तब तक संभव नहीं है, जब तक चुनाव संपन्न नहीं हो जाते.

अनुभव
छत्तीसगढ़ में 11 और 19 नवम्बर को दो चरणों में चुनाव होने हैं. पहले चरण में नक्सल प्रभावित बस्तर और राजनांदगांव की 18 सीटों पर मतदान होना है. पहले चरण के मतदान के लिये सुरक्षाबलों की 560 कंपनियां इन इलाकों में भेजी गई हैं.

इन कंपनियों को भेजने के लिये 1100 बसों समेत लगभग 1800 वाहनों की ज़रुरत थी. लेकिन जब बसों के अधिग्रहण का मामला सामने आया तो बस मालिकों ने हाथ खड़े कर लिये.

छत्तीसगढ़ परिवहन संघ के महासचिव सैय्यद अनवर अली का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कई जगहों पर सुरक्षाबल के लोगों ने बसों के ड्राइवरों को कई-कई दिनों तक रस्सी से बांध कर रखा था. उन्हें डर था कि ये ड्राइवर अगर बस छोड़ कर भाग गये तो उवे जंगल में फंस सकते हैं. यहां तक कि सुरक्षा का हवाला दे कर उनके सेलफोन तक छीन लिये गये थे.

अनवर अली कहते हैं- “ ड्राइवर इस बार बस्तर के इलाके में जाने के लिये तैयार ही नहीं थे. बड़ी मुश्किल से हमारी बसों के ड्राइवर तब जा कर तैयार हुये, जब पुलिस महानिदेशक रामनिवास से सारे जिलों के एसपी को बसों के ड्राइवरों के साथ मानवीय व्यवहार के निर्देश दिये. इसके अलावा डीजीपी ने हमें आश्वस्त किया था कि बसें निर्धारित स्थल पर सैन्य बल को छोड़ कर वापस लौट जाएंगी.”

नहीं लौटी बस
लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अनवर अली का दावा है कि 13 अक्टूबर से बसों की बस्तर के इलाके में रवानगी शुरु हुई लेकिन उनकी खुद की रॉयल ट्रैवल्स की 14 में से एक भी बस अब तक नहीं लौटी.

अनवर कहते हैं- “जबसे हमारी बसें गई हैं, हमारे तीन ड्राइवर-कंडेक्टर ऐसे हैं, जिनसे हमारा संपर्क नहीं हो पाया है. वे कहां हैं, कैसे हैं, कुछ पता नहीं चल पा रहा है.”

पिछले चुनाव में सुरक्षा बल को लेकर बस्तर गये ड्राइवर विजय देवांगन बताते हैं कि घने जंगलों वाले इलाके में तो एक बार जाने के बाद सब कुछ भगवान भरोसे ही होता है.

विजय कहते हैं- “बसों में जवान सवार हुये, उसके बाद बस और ड्राइवर कंडक्टर उनके कब्जे में होते हैं. पिछली चुनाव में तो बस्तर गई कई बसों को सुरक्षा बल के जवान मध्यप्रदेश ले कर चले गये थे. बस मालिकों को भी महीने भर बाद खबर मिली.”

बस ड्राइवरों के बेबस परिजन
कई लोग ऐसे भी हैं, जो नक्सली दहशत के कारण हर दिन बस लेकर बस्तर गये अपने परिजनों के सुरक्षित होने की कामना कर रहे हैं.

एक निजी बस कंपनी की बस लेकर दंतेवाड़ा गये बिलासपुर के मनोज चंद्रवंशी के परिजन 14 अक्टूबर से परेशान हैं. मनोज की पत्नी आरती कहती हैं- “ 16 अक्टूबर को उनसे अंतिम बातचीत हुई थी. उसके बाद से पता नहीं है कि वे कहां है. उनका मोबाइल बंद है. मैं रोज भगवान से मनाती हूं कि मेरे पति को सही सलामत लौटा दें.”

छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के महासचिव भावेश दुबे का आरोप है कि पुलिस महानिदेशक के बार-बार के निर्देशों के बाद भी ड्राइवरों और कंडक्टरों को नक्सल इलाकों में इतने दिनों तक लगभग लापता हालत में छोड़ने के कारण परिजन परेशान हैं.

भावेश कहते हैं- “परिवहन विभाग और पुलिस में तालमेल की कमी है, जिसका खामियाजा हम बस मालिकों, हमारे ड्राइवर-कंडक्टरों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है.”

छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त परिवहन आयुक्त एच. के. राठौर भी स्वीकारते हैं कि चुनाव संपन्न हुये बिना बसों के ड्राइवर और कंडक्टरों की वापसी न को संभव है और ना ही व्यावहारिक.

राठौर का तर्क है कि किसी बस को हज़ारों किलोमीटर दूर सरगुजा से बस्तर भेजा गया है तो उसे खाली वापस करना और फिर सुरक्षा बल को लेने के लिये उसको बस्तर भेजना समयसाध्य भी है और खर्चीला भी. वे कहते हैं- “बसें तो चुनाव खत्म होने के बाद ही वापस आ पायेंगी. हमारी कोशिश ये ज़रुर है कि हम ड्राइवरों और कंडक्टरों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित कर सकें. ”

हालांकि राज्य के पुलिस महानिदेशक रामनिवास का कहना है कि कुछ इलाकों से बसों और उनके ड्राइवर-कंडेक्टरों की वापसी शुरु हो गई है. रामनिवास कहते हैं-जल्दी ही तमाम बसें और उनके ड्राइवर-कंडक्टर लौट आएंगे. मैं इस बारे में अधिकारियों को निर्देश दे रहा हूं.

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