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जिम्बाब्वे में स्वास्थ्य बीमा की जगह अंतिम संस्कार बीमा को तरजीह

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03 फ़र. 2026, 06:59 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

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हरारे । डेस्क: जिम्बाब्वे में एक अजीबोगरीब और विचलित करने वाली सामाजिक हकीकत सामने आई है, जहां लोग जीवित रहने के लिए इलाज कराने के बजाय अपनी मौत के बाद के खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं. देश में स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) की तुलना में अंतिम संस्कार बीमा (फ्यूनरल इंश्योरेंस) कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 


वित्तीय समावेशन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, बीमा कराने वाले करीब 72 प्रतिशत लोगों के पास अंतिम संस्कार की पॉलिसी है, जबकि केवल 30 प्रतिशत लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है. यह स्थिति उन परिवारों की दुखद दास्तां बयां करती है जो इलाज के अभाव में अपनों को खो देते हैं, लेकिन उनके अंतिम संस्कार के समय भव्य आयोजन सुनिश्चित करते हैं.

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जिम्बाब्वे की करीब 90 प्रतिशत आबादी के पास कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं है. सरकारी अस्पतालों की बदहाली और निजी अस्पतालों की भारी फीस ने आम आदमी को चिकित्सा देखभाल से दूर कर दिया है. जहां एक विशेषज्ञ डॉक्टर की फीस ही कई सौ डॉलर हो सकती है, वहीं अधिकांश आबादी की दैनिक आय 3.65 डॉलर से भी कम है. लोग अस्पतालों के चक्कर लगाने के बजाय घरेलू उपचार या पारंपरिक चिकित्सकों पर निर्भर रहते हैं, जिससे अक्सर उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है. 


एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कई परिवार महीनों तक इलाज के लिए पैसे जुटाने की कोशिश करते हैं और जब तक राशि जमा होती है, तब तक मरीज दम तोड़ चुका होता है. विडंबना यह है कि वही परिवार जो इलाज के लिए कुछ सौ डॉलर नहीं जुटा पाते, वे अंतिम संस्कार की मासिक किश्तों को कभी नहीं चूकते.


देश की सांस्कृतिक मान्यताओं में मृत्यु के बाद की गरिमा को जीवन की सुरक्षा से ऊपर रखा जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्बाब्वे के समाज में मृत्यु को एक अपरिहार्य और सामुदायिक घटना माना जाता है, जिसके लिए पहले से तैयारी करना सम्मान की बात है. इसके विपरीत, बीमारी के बारे में सोचना अक्सर एक वर्जना माना जाता है, जैसे कि स्वास्थ्य बीमा लेना किसी अनहोनी को आमंत्रित करना हो. 


इसी मानसिकता और सस्ती प्रीमियम दरों के कारण फ्यूनरल पॉलिसियों का बाजार फल-फूल रहा है. जहां स्वास्थ्य बीमा की दरें काफी ऊंची हैं, वहीं कुछ अंतिम संस्कार योजनाएं मात्र एक डॉलर प्रति माह से शुरू हो जाती हैं, जो गरीब तबके के लिए भी सुलभ हैं.


जिम्बाब्वे का सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा पिछले कुछ दशकों में चरमरा गया है. दवाओं की कमी, चिकित्सा पेशेवरों का पलायन और बुनियादी ढांचे का अभाव आम बात है. प्रति एक हजार लोगों पर बिस्तर की उपलब्धता और मातृ मृत्यु दर के आंकड़े वैश्विक मानकों से काफी पीछे हैं. ऐसी स्थिति में, मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग स्वास्थ्य सेवाओं को एक विलासिता मानने लगे हैं. 


हालांकि सरकार ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन बढ़ते सार्वजनिक ऋण, मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता के बीच इसकी सफलता पर विशेषज्ञ संदेह जता रहे हैं.


आर्थिक तंगी और औपचारिक बीमा की पहुंच से दूर लोग अब सामुदायिक स्तर पर छोटे-छोटे बचत समूह बना रहे हैं. ये अनौपचारिक समूह सदस्य की मृत्यु पर कफन, ताबूत और भोजन के खर्च में मदद करते हैं. ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति यह है कि लोग अपनी पूरी जमा-पूंजी इन समूहों में लगा देते हैं ताकि मरने के बाद उन्हें समाज में उपहास का पात्र न बनना पड़े. 


जानकारों का कहना है कि यह "जीवन का व्यावसायीकरण" है, जहां आधुनिक दौर ने लोगों को जीवन बचाने से ज्यादा मौत का उत्सव मनाने के लिए मजबूर कर दिया है. फिलहाल, जिम्बाब्वे के लिए चुनौती यह है कि वह अपने नागरिकों को यह विश्वास कैसे दिलाए कि सम्मानजनक मृत्यु से कहीं अधिक महत्वपूर्ण गरिमापूर्ण जीवन और समय पर चिकित्सा सहायता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP