रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

आपके जवाब यांत्रिक, साइक्लोस्टाइल हैं: SC ने EC को लगाई फटकार

C

CG Khabar

10 दिस. 2025, 12:23 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (EC) को कड़ी फटकार लगाई है. जब तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों और केरल में बाहर पढ़ रहे छात्रों सहित कई मतदाताओं ने चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में फॉर्म जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने ईसी के इस रवैये पर नाराज़गी व्यक्त की कि हर बार मानवीय समस्या सामने आने पर आयोग सिर्फ़ फॉर्म जमा होने के प्रतिशत के आँकड़े देकर "यांत्रिक और साइक्लोस्टाइल" जवाब देता है.


तमिलनाडु में, याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के कई प्रवासी मज़दूर वार्षिक सबरीमाला तीर्थयात्रा के लिए गए हैं और पोंगल (जनवरी के मध्य) तक लौटेंगे, जबकि फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 11 दिसंबर है. इसके जवाब में, ईसी ने केवल यह कहा कि तमिलनाडु में 99.27% फॉर्म प्राप्त और डिजिटाइज़ हो चुके हैं. 

विज्ञापन

केरल सरकार और वरिष्ठ वकील पी.वी. सुरेंद्रनाथ ने भी छात्रों और अधिवक्ताओं की व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए दो सप्ताह के विस्तार की मांग की, जिस पर ईसी ने 97.42% फॉर्म डिजिटाइज़ होने का हवाला दिया.


कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यावहारिक मुश्किलों के जवाब में बार-बार केवल आँकड़े पेश करना उचित नहीं है.


न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) पर काम के अत्यधिक दबाव का भी मुद्दा उठाया. ईसी ने इसे "राजनीतिक विमर्श" बताते हुए ख़ारिज कर दिया और कहा कि एक बीएलओ 37 दिनों में प्रतिदिन 35 मतदाताओं को आसानी से कवर कर सकता है. हालांकि, जस्टिस बागची ने कहा कि यह काम केवल "डेस्क वर्क" नहीं, बल्कि घर-घर जाकर सत्यापन का 'प्योर लेग वर्क' है.


ईसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने उलटे राजनीतिक दलों पर बीएलओ के काम में हस्तक्षेप करने और उन्हें तनाव देने का आरोप लगाया, ख़ासकर पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में.


इस पर मुख्य न्यायाधीश कांत ने ईसी को सख्त लहजे में कहा कि बीएलओ उनके वैधानिक कर्तव्य निभा रहे हैं और इस समय वे "आपके कर्मचारी हैं. बीएलओ की सुरक्षा आपकी और संबंधित राज्य की ज़िम्मेदारी है." 


जब ईसी ने अपनी शक्तियों का हवाला दिया, तो सीजेआई ने पूछा कि उसने हिंसा के मामलों में अपनी शक्तियों का प्रयोग "क्यों नहीं किया?" ईसी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह बीएलओ की सुरक्षा के लिए "आवश्यक कार्रवाई करेगा" और "सख्त कदम उठाएगा." 


कोर्ट ने स्थिति का आकलन करने और ज़रूरत पड़ने पर उपयुक्त आदेश पारित करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को तय की.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP