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क्या 28 जुलाई के बाद फिर शुरू होगा CJP का बड़ा आंदोलन?

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27 जुल. 2026, 02:46 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

सौरभ दास
सौरभ दास

नई दिल्ली । डेस्क: विपक्ष और छात्र संगठनों के बीच जारी खींचतान के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि असम, बंगाल और बिहार में गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा नहीं किया गया और उन पर दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) वापस नहीं ली गईं, तो वे दोबारा अपना देशव्यापी आंदोलन शुरू कर देंगे. 


यह बयान ऐसे समय में आया है जब महज दो दिन पहले ही 25 जुलाई को CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुधारों जैसे प्रमुख मांगों पर सरकार से बनी सहमति के बाद अपने 36 दिनों से चले आ रहे प्रदर्शन को समाप्त किया था.

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CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हो रही यह दंडात्मक कार्रवाई युवाओं के साथ एक बड़ा विश्वासघात है. 

उन्होंने बताया कि सरकार ने आश्वासन दिया था कि किसी भी प्रदर्शनकारी पर कोई नकारात्मक या दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा. इसके बावजूद बिहार, बंगाल और असम जैसी जगहों से छात्रों और युवाओं की गिरफ्तारियों की लगातार खबरें सामने आ रही हैं. 


पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सरकार पर पुलिस कार्रवाई न करने के समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दर्ज सभी मामलों को रद्द करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि सरकार मंगलवार, 28 जुलाई तक लिखित गारंटी जारी करे, अन्यथा पार्टी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी.


दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी इस स्थिति पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों निर्दोष छात्रों को बिहार में गंभीर धाराओं के तहत जेल में डाला गया है. 


उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि इन मामलों को वापस नहीं लिया गया तो बिहार में भी दिल्ली जैसा उग्र आंदोलन देखने को मिल सकता है.


उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर 6 जून से शुरू हुए इस आंदोलन ने 28 जून को लद्दाख के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन से जुड़ने के बाद काफी गति पकड़ी थी. 23 जुलाई को वांगचुक का अनशन समाप्त होने और 25 जुलाई को सरकार द्वारा नीट पीड़ितों के परिजनों को आर्थिक सहायता व परीक्षा सुधारों पर सहमति जताने के बाद आंदोलन को विराम दिया गया था. 


CJP ने सरकार को अपने 5-सूत्रीय मांग पत्र पर अमल करने के लिए एक मसौदा सौंपा है और मंगलवार तक आधिकारिक लिखित गारंटी मांगी है. पार्टी की कानूनी टीम फिलहाल विभिन्न राज्यों के वकीलों के साथ समन्वय बनाकर हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई की प्रक्रिया में जुटी हुई है. यदि सरकार समय सीमा के भीतर अपने वादे पूरे नहीं करती है, तो देश में एक बार फिर छात्रों का बड़ा आंदोलन भड़कने के पूरे आसार हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP