पश्चिम एशिया संकट: भारत के $11.8 अरब के कृषि निर्यात पर खतरा
नई दिल्ली । डेस्क: ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष ने भारत के कृषि एवं खाद्य निर्यात के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है. वर्ष 2025 में भारत ने इस क्षेत्र को लगभग 11.8 अरब डॉलर मूल्य के अनाज, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और मसालों का निर्यात किया था, जो भारत के कुल वैश्विक कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत हिस्सा है.
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि क्षेत्र में जारी अस्थिरता के कारण शिपिंग रूट बाधित हो रहे हैं और बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे लॉजिस्टिक्स में अनिश्चितता पैदा हो गई है.
आंकड़ों के मुताबिक, भारत के लिए खाड़ी देश एक प्राकृतिक और प्रमुख बाजार रहे हैं, जिसका मुख्य कारण भौगोलिक निकटता और वहां रहने वाली बड़ी भारतीय आबादी है. विशेष रूप से चावल के निर्यात पर इसका सबसे बड़ा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया था, जो देश के कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7 प्रतिशत है.
इससे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों और उत्पादकों पर सीधा असर पड़ सकता है.
इसके अलावा, भारत ने इस क्षेत्र को 396.5 मिलियन डॉलर के केले, 281.1 मिलियन डॉलर के डेयरी उत्पाद और भारी मात्रा में चाय, कॉफी व मसालों का निर्यात किया है.
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो बढ़ती शिपिंग लागत और मार्ग परिवर्तन भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकते हैं और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.