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लोकसभा में वक्फ़ संशोधन बिल पास

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03 अप्रै. 2025, 01:07 AM 5 मिनट में पढ़ें 4

वक्फ़ संशोधन बिल पास
वक्फ़ संशोधन बिल पास

नई दिल्ली | डेस्क: वक्फ़ संशोधन बिल विपक्ष के भारी विरोध के बाद लोकसभा में पास हो गया है. बुधवार को देर रात इस बिल पर वोटिंग हुई, जिसमें बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े. अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा.


नए संशोधन के बाद सेंट्रल वक्फ़ काउंसिल और वक्फ़ बोर्डों में दो ग़ैर-मुस्लिम सदस्य शामिल हो जाएंगे. इसके अलावा वही व्यक्ति वक़्फ़ को दान दे पाएगा, जो कम से कम पांच वर्षों इस्लाम धर्म का पालन कर रहा हो. वक्फ़ के पास जो सरकारी ज़मीन है उसकी मल्कियत स्थानीय कलेक्टर तय करेगा.

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इससे पहले लोकसभा में इस बिल को लेकर खूब बहस हुई. इंडिया गठबंधन इस बिल के विरोध में था तो एनडीए के दल समर्थन में. वक़्फ़ संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार मस्जिदों के प्रबंधन या धार्मिक क्रियाकलापों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी. इसके बाद विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है.


उन्होंने कहा, "विपक्ष बताए कि कैसे ये बिल गैर संवैधानिक है. जो नहीं समझना चाहते हैं उन्हें नहीं समझाया जा सकता है. कई सदस्यों ने कुछ अच्छे मुद्दे भी उठाए हैं. बार-बार ये आरोप लगाया जा रहा है कि हमारी सरकार मुसलमानों के खिलाफ है. लेकिन हम बांट नहीं रहे हैं, हम उन्हें एक कर रहे हैं. इस देश से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं है. इस देश में अल्पसंख्यक पूरी तरह से सुरक्षित हैं."


इससे पहले टीएमसी संसदीय दल के नेता कल्याण बनर्जी समेत विपक्ष के कई सांसदों ने वक़्फ़ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि ये संविधान के ख़िलाफ़ है.


कांग्रेस के गौरव गोगोई और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सांवत ने आरोप लगाया कि बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति में ठीक से चर्चा तक नहीं हुई.


कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "बहुत सारे बिल लाए जा रहे हैं. लेकिन जिन बिलों की मांग हो रही है वो नहीं लाए जा रहे हैं. किसान आय को डबल करने के बिल की मांग कर रहे हैं, लेकिन वो बिल नहीं लाया जा रहा है. देश का युवा बेरोजगार है, लेकिन ऐसा कोई बिल नहीं लाया जा रहा है जिससे उनकी समस्या कम हो. जिस तरह की इस सरकार की प्राथमिकता है उससे पता चलता है कि इनका सिर्फ एक एजेंडा है. धर्म के नाम पर भारत माता को बांटने का. सिर्फ एक ही एजेंडा है."


लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार वक्फ़ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और गड़बड़ियों को ख़त्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.


अमित शाह ने कहा कि वक्फ बोर्ड और परिषद का काम इन संपत्तियों को बेईमानी से हड़पने वाले लोगों को पकड़ना और उन्हें बाहर निकालना है.


उन्होंने कहा कि वक्फ की आमदनी लगातार गिर रही है क्योंकि संपत्तियों को अवैध रूप से सौ-सौ साल तक के लिए किराए पर दिया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य इस विधेयक के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय का विकास करना और इस्लाम धर्म की धार्मिक संस्थाओं को अधिक मजबूत करना है.


बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, "इस उम्मीद में विकास है और कहीं ना कहीं इसी को देखकर आज देशभर के लोग इसके समर्थन में हैं. वक़्फ़ को बदलने का समय आ गया है. ये अत्याचार और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. भारत को वक़्फ़ के खौफ से आजादी चाहिए. कांग्रेस के वक्त तो यही था - ना खाता ना बही जो वक़्फ़ कहे वही सही."


कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "मुसलमानों के वक्फ की जमीन पर सरकार की नजर है. स्थिति यह है कि वक्फ बिल का ड्राफ्ट करने वालों को भी इसके बारे में जानकारी नहीं है कि वक्फ की जमीनों पर पहले गैर जमानती कब्जा था. अब इसे जमानती धाराओं में लाया गया है. सरकार इस तरह वक्फ की जमीन पर कब्जे को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है.


इमरान मसूद ने कहा, "वक्फ को मुसलमान जानता है और समझता भी है. अब वक़्फ़ कमेटी में 11 सदस्य गैर मुस्लिम होंगे, क्या किसी अन्य धर्म के ट्रस्ट में गैर मुस्लिम को रखा जाता है. ऐसे में मुसलमानों को न्याय कैसे मिलेगा? यूपी में 78 फीसदी वक्फ की जमीनों को सरकारी बता दिया गया. कर्नाटक में भी इसी तरह कई जमीनों पर सरकारी कब्जा हुआ था."


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "ये बिल भारत के मुसलमानों पर हमला है. मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है. ये बिल असंवैधानिक है. इस देश में झगड़े पैदा करने का काम बीजेपी करना चाहती है मंदिर और मस्जिद के नाम पर."


शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल "बीजेपी को मुसलमान कहां से याद आ गए. आज इन्हें इतना दर्द कहां आ गया. जुबां में इनके दुआ है, लेकिन दिल इनका काला है. इनके लोगों को छोड़कर जेपीसी में कोई इस बिल का समर्थन नहीं कर रहा है. अगर इस बिल में कुछ अच्छा होता तो फिर देश का अल्पसंख्यक समुदाय इस बिल का समर्थन कर रहा होता."

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP